लाहौल-स्पीति में नगदी फसल अगस्त से अक्तूबर और सेब अक्तूबर-नवंबर में तैयार होती है। मतलब, जब खेतों में फसल और पेड़ों में सेब तैयार होता है तो बीमा का रिस्क कवर समाप्त हो जाता है। जिप अध्यक्ष रमेश रूवलवा ने कहा कि सरकार को जनजातीय किसानों के हितों में ध्यान में रखते हुए फसल बीमा रिस्क का दायरा जुलाई की बजाय नवंबर तक बढ़ाना चाहिए।
लाहौल प्रधान संघ के अध्यक्ष सतप्रकाश ने कहा कि लाहौल-स्पीति से ही कृषि मंत्री होने के बावजूद घाटी के फसल और सेब कृषि बीमा योजना से बाहर होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उधर, जिला कृषि अधिकारी हेमराज वर्मा ने कहा कि खरीफ फसलों का बीमा रिस्क कवर 31 जुलाई तक निर्धारित है।
उधर, चंडीगढ़ में तैनात कृषि बीमा कंपनी के रिजनल मैनेजर जसपाल सिंह ने कहा कि बागवानी निदेशालय के सुझाव पर रिस्क कवर की अवधि को अक्तूबर तक बढ़ाया जा सकता है। फसल बीमा योजना के निर्देशों के मुताबिक 31 जुलाई के बाद प्राकृतिक आपदा से नुकसान होने की सूरत में किसानों को फसलों तथा फलों के फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा।