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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दायरे में नहीं आता देश का ये जिला

Mon, 31 Dec 2018 10:27 AM IST
अरविन्द ठाकुर अशोक राणा, अमर उजाला, केलांग (लाहौल-स्पीति)
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सांकेतिक तस्वीर
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देश में लाहौल-स्पीति ही एकमात्र ऐसा जिला है, जिसे फसल बीमा योजना के दायरे से बाहर रखा गया है। यहां पैदा होने वाली नगदी फसलों के साथ ही सेब को भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल नहीं किया गया है। लाहौल-स्पीति में करीब 5 हजार बीघा भूमि पर आलू, मटर, गोभी और लिलियम के फूलों की खेती हो रही है। लगभग 2 हजार बीघा भूमि पर सेब के बगीचे लहलहा रहे हैं।

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विकट भौगोलिक पृष्ठभूमि के कारण यहां साल भर में महज एक फसल चक्र चलता है। घाटी की पूरी आर्थिकी कृषि पर टिकी है। बावजूद इसके लाहौल-स्पीति को फसल बीमा योजना के दायरे से बाहर रखना हैरान करने वाला है।

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक लाहौल-स्पीति की कृषि और बागवानी खरीफ की फसलों के दायरे में आनी चाहिए, लेकिन प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दायरे में ज्वार, बाजरा, मक्की, गन्ना, कपास और चावल जैसे खरीफ के फसलों को शामिल किया गया है।
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इनमें एक भी फसल का लाहौल-स्पीति में उत्पादन नहीं होता है। हरे मटर को बीमा के दायरे में शामिल किया है। कृषि फसल बीमा योजना कंपनी के मुताबिक रबी फसलों का रिस्क कवर अक्तूबर से मार्च और खरीफ फसलों का बीमा रिस्क 31 जुलाई तक निर्धारित किया गया है।

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लाहौल-स्पीति में नगदी फसल अगस्त से अक्तूबर और सेब अक्तूबर-नवंबर में तैयार होती है। मतलब, जब खेतों में फसल और पेड़ों में सेब तैयार होता है तो बीमा का रिस्क कवर समाप्त हो जाता है। जिप अध्यक्ष रमेश रूवलवा ने कहा कि सरकार को जनजातीय किसानों के हितों में ध्यान में रखते हुए फसल बीमा रिस्क का दायरा जुलाई की बजाय नवंबर तक बढ़ाना चाहिए।

लाहौल प्रधान संघ के अध्यक्ष सतप्रकाश ने कहा कि लाहौल-स्पीति से ही कृषि मंत्री होने के बावजूद घाटी के फसल और सेब कृषि बीमा योजना से बाहर होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उधर, जिला कृषि अधिकारी हेमराज वर्मा ने कहा कि खरीफ फसलों का बीमा रिस्क कवर 31 जुलाई तक निर्धारित है।

उधर, चंडीगढ़ में तैनात कृषि बीमा कंपनी के रिजनल मैनेजर जसपाल सिंह ने कहा कि बागवानी निदेशालय के सुझाव पर रिस्क कवर की अवधि को अक्तूबर तक बढ़ाया जा सकता है। फसल बीमा योजना के निर्देशों के मुताबिक 31 जुलाई के बाद प्राकृतिक आपदा से नुकसान होने की सूरत में किसानों को फसलों तथा फलों के फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा।
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