लाहौल आलू उत्पादक संघ के गोदाम में आलू बीज की छंटनी करतीं महिलाएं।
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लाहौल के आलू बीज की मांग देश के कई राज्यों से आने लगी है। इस बार लाहौल में करीब 35 हजार क्विंटल आलू बीज का उत्पादन हुआ है, लेकिन लाहौल आलू उत्पादक संघ को लेह से आई 10 हजार आलू बीज बोरी की डिमांड मनाली में फंस गई है। हालांकि लाहौल आलू उत्पादक संघ के कुछ ट्रक मनाली-लेह मार्ग होकर लेह के लिए रवाना भी हो गए थे। मगर पिछले पिछले सप्ताह हुई बर्फबारी के बाद जिला प्रशासन ने मनाली-लेह मार्ग को अधिकारिक रूप से बंद कर दिया है।
ऐसे में आलू बीज से लदे ट्रकों को दारचा से ही वापस मनाली आना पड़ा है। बताया जा रहा है कि अब आलू बीज से भरे ट्रकों को लाहौल आलू उत्पादक संघ जम्मू-कश्मीर होकर भेजने की तैयारी कर रहा है। ताकि समय पर आलू लेह पहुंच जाए। देशभर में विख्यात लाहौली आलू बीज की डिमांड भी लगातार बढ़ रही है। अभी तक लाहौल आलू उत्पादक संघ के पास करीब 20 हजार क्विंटल आलू बीज की मांग पहुंच गई है।
संघ के अध्यक्ष सुदर्शन जस्पा ने कहा कि उन्हें लेह से 10 हजार आलू बीज की बोरियों की मांग पहुंची है। मगर मनाली-लेह मार्ग को यातायात के लिए बंद करने से वह आलू को नहीं भेज सके हैं। उन्होंने कहा कि आलू बीज को अब जम्मू-कश्मीर से होकर भेजा जा रहा है। कुछ दिन में ट्रक लेह के लिए रवाना कर दिए जाएंगे।
अभी तक लाहौल आलू उत्पादक संघ के पास असम, गुजरात, पश्चिम-बंगाल, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश से आलू बीज की मांग आई है। चार हजार आलू के बीज की बोरियां प्रदेश सरकार ने भी मांगी हैं। लाहौल में कुफरी ज्योति, चंद्रमुखी और कुफरी हिमालयनी बीज की किस्मों को तैयार किया जाता है।