देवभूमि हिमाचल प्रदेश में प्रकृति के रौद्र रूप का सिलसिला जारी है। किन्नौर के बाद अब जनजातीय जिला लाहौल स्पीति की पट्टन घाटी में चंद्रभागा नदी पर पहाड़ टूटा है। शुक्रवार सुबह 9:00 बजे भारी भूस्खलन से टनों के हिसाब से मलबा और चट्टानें नदी में गिर गईं। पानी का बहाव दो घंटे के लिए रुक गया।
जलस्तर 20 गुना ज्यादा बढ़ गया। अफरातफरी के बीच जान बचाने के लिए नदी के किनारे बसे तडंग, जसरथ गांवों के 21 परिवारों के सहमे लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भाग गए। हालांकि, 11:00 बजे नदी के बहाव ने मलबे के बीच से रास्ता बना लिया और खतरे को कम कर दिया।
इससे प्रशासन और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली और लोग लौट आए। क्षेत्र में पानी भरने से तडंग गांव में चार घर जलमग्न हो गए जबकि छह गोशालाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। दो मवेशी बहे हैं। तडंग, जसरथ सहित नालडा और जुंडा गांवों की करीब 50 बीघा जमीन बह गई है।
सेब के साथ फूल गोभी, मटर, आलू की फसल तबाह हो गई है। राजस्व विभाग ने प्रारंभिक रिपोर्ट में 60 लाख रुपये का नुकसान आंका है, जो बढ़ सकता है। नालडा से जुंडा गांव के लिए सिंचाई परियोजना भी क्षतिग्रस्त हुई है। जलमग्न घरों के अंदर सारा सामान खराब हो गया है।
जिन चार घरों को नुकसान पहुंचा है, उनके 16 सदस्यों को प्रशासन ने तंबू और राशन देकर सुरक्षित स्थानों पर ठहराया है। उल्लेखनीय है कि बीते 27 जुलाई को आई बाढ़ की त्रासदी से लोग अभी तक उबरे भी नहीं थे कि अब पहाड़ टूटने की घटना ने फिर डरा दिया है। भले ही नदी का बहाव खुल गया है लेकिन खतरा कम नहीं हुआ है।
मंत्री, मुख्य सचिव और डीजीपी ने किया हवाई दौरा
तकनीकी शिक्षा मंत्री रामलाल मारकंडा, मुख्य सचिव रामसुभग सिंह और डीजीपी संजय कुंडू ने हवाई दौरा कर क्षेत्र का जायजा लिया। प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों का हालचाल भी जाना। मारकंडा ने ग्रामीणों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। उपायुक्त नीरज कुमार, एसपी मानव वर्मा सहित कई विभागों के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे।