उन्होंने लोगों से मेले के ऐतिहासिक महत्त्व को बनाए रखने, किसानों को जैविक खेती अपनाने और प्रदेश को नशा मुक्त बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार नशे को लेकर गंभीर है।
वर्ष 2022 तक पूरे प्रदेश को नशा मुक्त बनाने का संकल्प लिया है। करीब 337 साल से आयोजित किए जा रहे इस मेले की मशहूर किन्नौरी मार्केट इस बार भी सूखे मेवे, खुमानी, अखरोट, सेब, मटर, रत्नजोत, चिलगोजा और काला जीरा जैसे कई उत्पादों से सज गई है।
इसके अलावा ऊनी दोड़ू, पट्टू, कोट पट्टी, किन्नौरी शॉल व टोपियों के रूप में हस्तशिल्प के भी बेजोड़ नमूने देखने को मिल रहे हैं। चामुर्थी घोड़ों के लिए भी यह मेला मशहूर है।