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शिमला नगर निगम में पहली बार मेयर-डिप्टी मेयर पदों पर भाजपा का कब्जा

Wed, 21 Jun 2017 10:40 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, शिमला
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आखिरकार नगर निगम शिमला पर पहली बार कब्जा कर भाजपा ने इतिहास रच ही दिया। मंगलवार को मेयर और डिप्टी मेयर के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच गुप्त मतदान हुआ। मेयर पद पर कुसुम सदरेट, डिप्टी मेयर पद पर भाजपा में शामिल हुए निर्दलीय राकेश शर्मा की जीत हुई। 
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मतदान के दौरान क्रॉस वोटिंग और माकपा प्रत्याशी के सदन से गैरहाजिर रहने से कांग्रेस को दोहरा झटका लगा। कांग्रेस खेमे के एक पार्षद ने भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोट किया। मेयर पद पर भाजपा को 19 जबकि कांग्रेस को 13 मत मिले। एक वोट अवैध घोषित किया गया। डिप्टी मेयर के लिए भाजपा को 20 और कांग्रेस को 13 मत मिले। 

बचत भवन में हुए चुनाव के लिए प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था बना रखी थी। सुबह 10:30 बजे कांग्रेस विधायक अनिरुद्ध सिंह और पर्यटन निगम के उपाध्यक्ष हरीश जनारथा की अगुवाई में कांग्रेस समर्थित पार्षद पहुंचे। इसके बाद भाजपाइयों की सुरक्षा के बीच उनके 19 पार्षद पार्टी प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती, पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, विधायक राजीव बिंदल,
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स्थानीय विधायक सुरेश भारद्वाज के साथ पहुंचे। पुलिस प्रशासन ने सभी रास्तों पर पहरा लगा दिया, मुख्य गेट से ही आवाजाही रखी। इस गेट के भीतर निर्वाचित पार्षदों और कार्यालय में काम करने वाले कर्मचारियों को ही आने की इजाजत थी। कांग्रेस और भाजपा समर्थकों को गेट के भीतर नहीं आने दिया गया। हालांकि, भाजपा के आला नेताओं को भीतर आने दिया गया।
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ढाई साल के लिए मेयर बनी सदरेट

नगर निगम के कार्यकाल के पहले ढाई साल में मेयर का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रखा गया है। जबकि अगले ढाई साल का कार्यकाल अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। अनुसूचित जनजाति से पार्षद नहीं मिलने की स्थिति में सामान्य वर्ग के पार्षद को मौका मिल सकता है। ऐसे में कुसुम सदरेट ढाई साल के लिए मेयर बनी हैं। दिसंबर 2019 में नगर निगम को नया मेयर मिलेगा।

कांग्रेस ने उतारे थे सिमी नंदा और आनंद कौशल
सदन की कार्यवाही 11 बजे शुरू हुई। भाजपा की ओर से मेयर पद के लिए कुसुम सदरेट और डिप्टी मेयर के लिए राकेश शर्मा के नाम की प्रस्तावना की गई। कांग्रेस ने अपने पैनल में मेयर पद पर सिमी नंदा और डिप्टी मेयर पद पर आनंद कौशल का नाम दिया। पहले मेयर और उसके बाद डिप्टी मेयर के लिए वोटिंग हुई। चुनाव प्रक्रिया में माकपा समर्थित पार्षद के शामिल न होने की वजह से केवल 33 पार्षदों ने ही मत का इस्तेमाल किया। 

वरिष्ठता दरकिनार कर बनाया डिप्टी मेयर
इस बार मेयर पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था। डिप्टी मेयर पद भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ बागी होकर चुनाव लड़कर जीतने वाले राकेश शर्मा को मिला। बागी होने के बाद इन्हें पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया था। लेकिन चुनाव जीतने पर इन्हें सम्मान जनक  तरीके से पार्टी में वापस ले लिया था। भाजपा ने डिप्टी मेयर पद पर वरिष्ठता को दरकिनार कर पहली बार पार्षद जीतकर आए राकेश शर्मा को डिप्टी मेयर बनाया। 

जीत के बाद भाजपा ने निकाली विजय रैली
जीत के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर पटाखे छोड़े। इसके बाद निर्वाचित मेयर, डिप्टी मेयर, पार्षदों और समर्थकों ने लोअर बाजार से होते हुए नॉज, शेरे पंजाब तक ढोल-नगाड़ों के साथ रैली निकाली।
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