जिला कुल्लू की मशहूर टोपी, पुलें, स्टॉल, मफलर हों या बेहद स्वादिष्ट व पौष्टिक गुच्छी। अपने आप में अद्भुत ये सभी उत्पाद जल्द पेटेंट कराए जाएंगे। स्थानीय बाजार से लेकर वैश्विक स्तर पर इन उत्पादों की धमक बढ़ाने के लिए यह कवायद राज्य विभाग प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद (हिमकोस्ट) की ओर से चलाई जा रही है।
पेटेंट कराने का मकसद सिर्फ वाणिज्यिक दृष्टि से नहीं है, बल्कि पारंपरिक कला को बचाए रखना भी है। हिमकोस्ट की ओर से पेटेंट कराने के बाद उत्पादों को जीआई मार्क मिलेगा। इससे उत्पादों को एक वैश्विक पहचान मिलेगी।
साथ ही उत्पादन से जुड़े कुल्लूवासियों के भी दिन फिरेंगे। पेटेंट व जीआई मार्क मिलने के बाद विश्व के किसी भी कोने में इन उत्पादों का नकली उत्पादन नहीं हो पाएगा। कुल्लू जिला के उत्पादकों को इनके अच्छे दाम मिलेंगे। परिषद ने उपरोक्त उत्पादों का डाटा संबंधित क्षेत्र से एकत्रित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पेटेंट से पारंपरिक उत्पादों को मार्केट और रोजगार दोनों मिलेगा।
पीएम मोदी ने कुल्लवी टोपी पहन किया था विदेश दौरा
पिछले वर्ष इस्राइल दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुल्लू की टोपी पहनी हुई थी। उन्होंने टोपी पहनकर हजारों प्रवासी भारतीयों को संबोधित किया था। हिमाचली संस्कृति की पहचान टोपी को इस्राइल नेताओं ने खूब पसंद किया था।
बंजार में पैदा होती है ज्यादा गुच्छी
जिला कुल्लू में गुच्छी का कारोबार बड़े स्तर होता है। प्रकृतिक तौर पर उगने वाली गुच्छी जिला कुल्लू के बंजार मेें सबसे अधिक पाई जाती है। गुच्छी को देश के बड़े-बड़े होटलों के लिए भी सप्लाई किया जाता है। इसके अलावा मफलर व स्टॉल युवक व युवतियों की पहली पसंद है। ग्रामीण इलाकों में महिलाएं पुलें तैयार करती हैं। लेकिन उन्हें इसका उचित दाम नहीं मिल रहा है।
जिला कुल्लू के पांच उत्पादों का पेटेंट किया जा रहा है। इसकी प्रक्रिया हिमाचल प्रदेश राज्य विभाग प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद ने शुरू कर दी है। टोपी, मफलर, पुलें, स्टॉल और गुच्छी का डाटा एकत्रित करने का कार्य शुरू हो गया है। बाद में इसे चेन्नई भेजा जाएगा।
- कुणाल सत्यार्थी सदस्य सचिव हिमकोस्ट