कंगना में राजनीतिक अनुभव की कमी : चौहान
उधर, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने भाजपा सांसद कंगना रनौत के अधिकारियों को फटकार लगाने वाले बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सिस्टम में कमी हो सकती है और किसी अधिकारी से भी गलती हो सकती है, लेकिन अधिकारियों से काम लेने का भी एक मर्यादित तरीका होता है। सोशल मीडिया पर कंगना की ओर से अधिकारियों को लताड़ने का वीडियो उन्होंने भी देखा है और व्यक्तिगत तौर पर वह इस तरह के व्यवहार का समर्थन नहीं करते। चौहान ने कहा कि बैठक का उद्देश्य अधिकारियों से बातचीत करना, सरकार की योजनाओं पर फीडबैक लेना और यह पता करना होता है कि किस योजना में किस स्तर पर दिक्कत आ रही है। उन्होंने कहा कि कंगना रनौत को राजनीति का अनुभव कम होने के कारण राजनीतिक परिपक्वता की कमी नजर आती है।
वह जिस क्षेत्र से आई हैं, वहां और राजनीति में काफी अंतर है। लोगों की सेवा करना और उनसे जुड़े काम करवाना उतना आसान नहीं है, जितना बाहर से दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि कंगना ने अपनी सांसद निधि के करीब 11 करोड़ रुपये खर्च नहीं होने को लेकर अधिकारियों पर नाराजगी जताई। अगर काम नहीं हो रहा है तो जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि को सवाल पूछने का पूरा अधिकार है, लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों का अपना सम्मान और स्वाभिमान भी होता है। उन्होंने कहा कि अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी काम में देरी कर रहा है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए, लेकिन उसकी भी एक मर्यादा और तरीका है। प्रदेश में अधिकारी और कर्मचारी विकास कार्यों में सरकार का सहयोग करते हैं। ऐसे में यह कहना कि हिमाचल में अधिकारी काम नहीं करते, बिल्कुल गलत है। उन्होंने कंगना पर लगातार विवादों के जरिए सुर्खियों में रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि मंडी की जनता को इसका नुकसान भुगतना पड़ रहा है।