एकाएक जलस्तर बढ़ने से लोगों की उपजाऊ जमीन सहित फसल बह गई। खड्ड किनारे स्थित कुहमझवाड़ स्कूल के कमरे पानी और मलबे से भर गए। घटना के समय स्कूल में एक अध्यापक मौजूद था, जिन्हें ग्रामीणों ने मशक्कत के बाद सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। स्कूल का मैदान नष्ट हो गया है। स्कूल भवन के पिछली तरफ से मिट्टी बह गई, जिससे भवन को खतरा बन गया है।
गनीमत रही कि यह घटना शाम के समय हुई। यदि दिन में होती तो कई स्कूली विद्यार्थियों के साथ बड़ी अनहोनी हो सकती थी। उधर, बुधवार रात को बारिश से कुल्लू की गड़सा घाटी के खोड़ाआगे नाले में बाढ़ आ गई। बाढ़ से नाले के दोनों तरफ लोगों की जमीन को नुकसान हुआ है। कई घरों को भी खतरा हो गया है। जिला मंडी में बारिश से बहुत नुकसान हो रहा है।
वीरवार को कई स्थानों पर भूस्खलन से मार्ग बंद हो गए। कई मकानों को खतरा बन गया है। कुछ गोशालाएं ढही हैं। सुंदरनगर के चमुखा के मुकड़ानी गांव में गोशाला पर मलबा गिरने से गाय सहित चार बकरियों की दबकर मौत हो गई। सरकाघाट के हटली क्षेत्र में बारिश से नवाणी पंचायत के गांव कटोह के बालक राम के घर के पीछे ल्हासा गिरने से मलबा घर के नीचे के कमरों में घुस गया। इससे मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। मंडी शहर में सड़कों, पुलों और सार्वजनिक चौकों पर जलभराव हो गया। मंडी के कटौला में कई मकानों के आंगन ढह गए हैं। राजधानी शिमला में अपराह्न 3:30 बजे बारिश हुई।
जिला मुख्यालय चंबा से 12 किलोमीटर दूर मैहला में सिर पर पत्थर गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। जिस सड़क से व्यक्ति गुजर रहा था, वह पिछले 20 दिन से भूस्खलन के कारण बंद थी। बुधवार रात को प्रताप चंद पुत्र बुधिया राम निवासी गांव सकलाना डाकघर दाडवीं अपने घर की तरफ जा रहा था तो मैहला के पास उसके सिर पर पत्थर गिर गया। इससे उसकी मौत हो गई।