बीर सिंह बाढ़ आने के वक्त मौके पर मौजूद थे। उन्होंने कहा कि बुधवार दोपहर को उन्हें जोरदार आवाज सुनाई दी। उन्होंने सबसे पहले अपनी चाची व नंद लाल की पत्नी लीला देवी को बचाकर सड़क की तरफ जाने को कहा। इसी दौरान नंद लाल का चार साल का बेटा कृष्ण आंगनबाड़ी से आ रहा था तो उसको हाथ से पकड़कर खींचा और सड़क की तरफ भाग गया। जैसे ही उन्होंने पीछे देखा तो बिहाली गांव के सभी पांच घरों को नामोनिशान मिट गया था। उन्होंने कहा कि बादल फटने से नाले में बाढ़ का इतना भयंकर रूप था कि मलबा आने से पहले ही घरों की छतों के साथ उनके चाचा, सास व बहन बाढ़ में बह गए थे।
उन्होंने कहा कि यहां पर बीर सिंह, खीमी राम और नंद लाल के तीन परिवारों के 16 सदस्य रहते थे। इनमें से कुछ स्कूल गए थे तो कई लोग शरण गांव गए हुए थे, जहां उनके पुश्तैनी घर है। बीर सिंह ने कहा कि बाढ़ में पूरी तरह से बहे गांव को देखकर वह बेहोश गए थे और उन्हें करीब 10 मिनट बाद होश गया। नंद लाल, मूर्ति देवी और यान दासी को बाढ़ उनसे मात्र चार फीट की दूरी से बहा ले गई। यह मंजर बहुत ही डरावना व खतरनाक था।
बाढ़ में बह गईं 15 भेड़ें व गाय
जीवानाला में आई बाढ़ की चपेट में बिहाली गांव में तीन परिवारों की करीब 15 भेड़ें, गाय व अन्य पशु बह गए है। बीर सिंह ने कहा कि पानी का बहाव इतना तेज था कि किसी को संभलने का मौका भी नहीं मिल पाया।
संजीव के कंधे पर परिवार की जिम्मेदारी
बाढ़ में एक ही परिवार के तीन लोगों के बहने के बाद अब परिवार की पूरी जिम्मेदारी 22 साल के संजीव के कंधे पर आ गई है। पिता, बहन व बुआ को खोने के बाद बड़ा बेटा संजीव कुमार पर दुखों का पहाड़ टूट गया है। उनके ऊपर माता लीला देवी, 22 साल के छोटे भाई भाग सिंह व चार साल के सबसे छोटे भाई कृष्ण की जिंदगी को संवारने की जिम्मेदारी रहेगी।