जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव असलम बेग ने बताया कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने इस दुर्घटना में शिकार हुए पीड़ितों के परिजनों को हर्जाना देकर तुरंत राहत पहुंचाने के लिए हाईकोर्ट में एक सितंबर 2017 को प्रि-लिटिगेशन मिडिएशन लोक अदालत का आयोजन किया था, लेकिन मुआवजा निर्धारित नहीं हो सका था। ऐसे में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने अधिवक्ता समीर कश्यप को मध्यस्थ तैनात करके पीड़ित परिवारों के हर्जाने संबंधी मामलों का निराकरण करने का प्रयास किया।
मध्यस्थता के लिए 7, 12 और 23 अक्तूबर को दोनों पक्षों के बीच संयुक्त सुनवाई की गई, लेकिन इन प्रयासों से भी वांछित परिणाम हासिल नहीं हो सके, जिसके चलते प्राधिकरण ने अधिवक्ता गीतांजलि शर्मा को पीड़ित परिवार की ओर से मोटर वाहन अधिनियम ट्रिब्यूनल में क्लेम याचिका दायर करने व उन्हें कानूनी सहायता मुहैया करने के लिए बतौर अधिवक्ता नियुक्त किया गया। ट्रिब्यूनल ने याचिका को स्वीकारते हुए निगम को उक्त हर्जाना राशि ब्याज सहित पीड़ित परिवार के सभी सदस्यों के पक्ष में 45 दिन के भीतर अदा करने का फैसला सुनाया है।