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गैंगरेप एंड मर्डर: आला पुलिस अफसरों को क्यों थी खुलासा करने की जल्दबाजी, उठे सवाल

Tue, 18 Jul 2017 12:30 PM IST
चैतन्य ठाकुर/अमर उजाला, शिमला
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गुड़िया प्रकरण में प्रदेश पुलिस के आला अफसरों की हड़बड़ी ने पूरे पुलिस प्रशासन को सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है।
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मामले से जुड़े संदिग्धों की धरपकड़ के बाद जोश खरोश से प्रदेश पुलिस मुख्यालय में की गई प्रेस वार्ता अब खाकी पर ही भारी पड़ती नजर आ रही है। इस पूरे मामले में मीडिया के सामने छह आरोपियों को गिरफ्तार करने की बात कही गई। 

शासन और प्रदेश की जनता के सामने अपनी पीठ थपथपाने वाले इन वरिष्ठ पुलिस अफसरों का दांव जनता के आक्रोश के आगे अब उल्टा पड़ता नजर आ रहा है। 

आधे अधूरे तथ्यों को मीडिया के सामने पेश कर मामला हल करने का दावा ठोंक दिया गया लेकिन जब जनता ने गिरफ्तार हुए आरोपियों के बारे में सबूत मांगे तो अब नजर चुराते नजर आ रहे हैं। 
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पुलिस आज तक ऐसा एक भी ठोस सबूत पेश नहीं कर पा रही है जिससे वह साबित कर पाए कि इन्हीं आरोपियों ने दरिंदगी को अंजाम दिया है। गुड़ियां की एक  जुराब तक बरामद नहीं हो पाई है और न ही इस बात का कोई प्रमाणिक तथ्य है कि गु़ड़ियां के साथ कहां दरिंदगी की गई। 

हालांकि प्रेस वार्ता में वरिष्ठ अफसरों ने यहां तक दावा किया कि जो गिरफ्तार किए गए हैं इनके खिलाफ तमाम साक्ष्य हैं लेकिन अब वह साक्ष्य हवा में कहां छू हो गए इसका जवाब किसी से देते नहीं बन रहा।

शासन और जनता के आगे अपनी पीठ थपथपाना पड़ गया अब भारी

हालांकि यह भी संभावना है कि केस को प्रभावित होने के अंदेशे से उसे सार्वजनिक करने से पुलिस बच रही हो लेकिन बढ़ते जनाक्रोश को शांत करने के लिए एक बार फिर से प्रदेश पुलिस मुख्यालय को प्रेस वार्ता कर सही तथ्य जनता के सामने रखने चाहिए। बता दें कि इस केस के लिए बनाई गई एसआईटी के प्रमुख प्रेस वार्ता के बाद से अपने निजी कारणों से छुट्टी पर हैं।

शिमला पुलिस के अधिकारी और उनके अधीनस्थ ही अब जांच को आगे बढ़ा रहे हैं। यह सही है कि इस संगीन और ब्लाइड मर्डर को तत्काल हर करने के लिए स्मार्ट पुलिस के पास कोई जादू की छड़ी नहीं है।

सब जानते हैं कि किसी भी केस में पहले संदिग्धों से पूछताछ होती है और कुछ क्लू मिलने पर उन्हें हिरासत में लिया जाता है और फिर मेडिकल और पुलिस रिमांड पर आरोपी लिए जाते

हैं उसी के बाद असली तहकीकात शुरू होती है। लेकिन प्रदेश पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ पुलिस अफसरों ने इसका भी इंतजार नहीं किया जैसे ही आरोपियों को कोटखाई थाने में पहुंचाया गया उन्होंने  गुडियां प्रकरण का आरोपी बताकर सीना चौड़ा कर प्रेस वार्ता कर डाली।

अब सबूत देने में क्यों कतरा रही स्मार्ट पुलिस

अब इन आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाने के लिए खाकी के हाथ पांव फूल रहे हैं। वरिष्ठ अफसरों की इसी जल्दबाजी ने जन आक्रोश को बढ़ाया और गिरफ्तार किए गए आरोपियों की संलिप्तता पर सवाल उठाए। ठियोग और कोटखाई में हुआ जन आंदोलन इसका सटीक उदाहरण है जो प्रेस वार्ता के ठीक अगले दिन हुआ उसके बाद भी तत्काल प्रदर्शन हो रहे हैं।

जनता के  इन सवालों को गलत ठहराने की चुनौती पुलिस सहज तरीके से नहीं ले पा रही है अगर पुलिस प्रेस वार्ता के दिन से अपनी जगह सही है तो जनता की ओर से उठाए गए सवालों का तथ्यों के साथ जवाब देकर अपनी किरकिरी होने से बचा सकती है।

लेकिन वरिष्ठ अफसरों की हड़बड़ी ने मौजूदा समय में बढ़ रहे जनआक्रोश से  प्रदेश सरकार की फजीहत करवाने के साथ साथ  पुलिस को सवालों के कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया। अब आने वाले दिनों में देखना है कि पुलिस की यह जांच किस दिशा में घूमती है। मामले को लेकर किरकिरी झेल रही पुलिस को सही आरोपियों तक पहुंचना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।  

आरोपी को लेकर फिर जंगल पहुंची पुलिस

गुडि़या मामले में छह आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी शिमला पुलिस के हाथ कोई ठोस सबूत नहीं लगे हैं। पूछताछ में कोई खास सुराग नहीं मिलने पर शिमला पुलिस ने अब फिर जंगलों की खाक छानना शुरू कर दी है। रविवार को पुलिस एक आरोपी को लेकर फिर जंगल में उस जगह पहुंची जहां छात्रा की शव मिला था।

आरोपी को लेकर पुलिस जंगल में घूमती रही। सूत्रों की मानें, तो तमाम कोशिशों के बावजूद पुलिस को कोई बड़ा साक्ष्य नहीं मिला है। ऐसे में अब पुलिस की निगाहें फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट पर टिक गई हैं। 

सूत्रों का कहना है रविवार को आरोपी पुलिस को कभी जंगल के एक कोने में ले जाकर कहता रहा कि यहां दरिंदगी हुई थी तो कुछ देर बाद दूसरे ठिकाने में ले जाकर यही बात दोहराता रहा। दिन भर भटकने के बाद पुलिस बिना किसी ठोस सबूत के खाली हाथ लौट आई है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट को आधार मानें तो गुडि़या के  साथ जंगल में किसी खुले स्थान पर दरिंदगी हुई थी। गुडि़या की पीठ पर मिले निशान इस बात की ओर इशारा करते हैं। यह भी स्पष्ट है कि इस घटना में एक से ज्यादा आरोपी शामिल हैं।

घटनास्थल कहां है और इस दरिंदगी में कौन शामिल है? इन प्रश्नों के जवाब पुलिस खोज रही है। सभी छह आरोपी फिलहाल पुलिस रिमांड पर चल रहे हैं और उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच थाना कोटखाई में रखा गया है। 
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संदिग्ध छोड़े, रोजाना थाने में भरेंगे हाजिरी

आरोपियों के मोबाइल कब्जे में लेकर फोरेंसिक लैब भेजे गए हैं ताकि इनके मोबाइल से डिलीट हुए डाटा को रिकवर कर सकें और इस केस से संबंधित कुछ तथ्य हाथ लग पाए। गुडि़या की सहेलियों और सहपाठियों से भी पूछताछ की गई है। इसमें भी कोई खास सुराग नहीं मिला है।

गुडि़या की मां ने भी पुलिस को बताया था कि वह उस दिन घर से यह कहकर निकली थी कि वह या तो अपनी सहेली के यहां या फिर अपने मामा के घर रुकेगी। दोनों जगह वह नहीं गई और घटना वाले दिन पहली बार अकेले घर की ओर निकल गई। गुडि़या प्रकरण अब भी अनसुलझी पहेली की तरह पुलिस के सामने है।

आरोपियों की गिरफ्तारी और प्रेस वार्ता के बाद आला पुलिस अफसर इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहे हैं। मामला सीबीआई के सपुर्द करने की बात राज्य सरकार ने कर दी है, लेकिन अब सीबीआई इस केस को कब अपने हाथों में लेती है इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं। 

सूत्रों के अनुसार बीते दिन मेडिकल के लिए शिमला लाए गए दो संदिग्धों को पुलिस ने छोड़ दिया है। उन्हें रोजाना कोटखाई थाने में हाजिरी देने के लिए कहा गया है। 

आरोपियों को इलाका न छोड़ने की हिदायत दी गई है। उन्हें पूछताछ के लिए कभी भी बुलाया जा सकता है। उधर, आरोपियों के परिजनों का दावा है कि हमारे बच्चे बेकसूर हैं। बच्चे किसी भी जांच में शामिल होने के लिए तैयार हैं। 
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