कोटखाई (शिमला) के गुड़िया प्रकरण से सरकार पर सियासी संकट गहरा गया है। जिन सवालों को पहले जनता उठा रही थी उन्हें विपक्ष के साथ अब सरकार के मंत्री व विधायकों के समर्थन भी मिलने लगा है। 15 दिन से जनाक्रोश को थामने में सरकारी तंत्र विफल रहा है, जिसका फायदा भाजपा उठा रही है।
भाजपा ने मामले को प्रदेश से निकालकर लोकसभा में पहुंचा दिया। राजभवन ने हस्तक्षेप कर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। गुड़िया प्रकरण में लगातार आरोपों में घिरी सरकार की दिक्कतें आने वाले दिनों में और बढ़ती दिख रही हैं।
कस्टडी में एक आरोपी की मौत तक सरकार यह मानने को तैयार नहीं हुई कि मामले में अधिकारियों के स्तर से कोई चूक हुई है। विपक्ष के लगातार हमलों को मामले का राजनीतिकरण बता कर पल्ला झाड़ रही सरकार के मंत्री जीएस बाली ने फेसबुक पर पोस्ट डाली है।
मंत्री बाली के भी सुर बुलंद
मंत्री बाली के साथ विधायक रोहित ठाकुर भी लापरवाही करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के सुर बुलंद कर दिए हैं। मेजर विजय सिंह मनकोटिया के भी इस प्रकरण में कूदने से भाजपा को बल मिला है। चुनावी वर्ष में यह स्थितियां सरकार पर भारी पड़ सकती हैं।
प्रकरण में सरकार का डैमेज कंट्रोल तंत्र नहीं दिखा। एसएसपी शिमला के खिलाफ जनता के आंदोलन से लेकर सीएम के फेसबुक पेज पर कथित आरोपियों के फोटो डालने तक सरकार की चुप्पी नहीं टूटी।
पीड़ित परिवार से मिलने न तो सीएम गए, न ही उनके कैबिनेट का कोई मंत्री सांत्वना देने पहुंचा। अब पुलिस कस्टडी में मौत के बाद सरकार ने विपक्ष को एक बार फिर हमलावर होने का मौका थमा दिया। हालांकि जनता प्रकरण में विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठा रही है।
अब तक सरकार क्यों मौन
सरकार की परेशानी आने वाले दिनों में और बढे़गी। मामले में सीबीआई जांच से सरकार को राहत के आसार नहीं हैं। भाजपा जिन सवालों को उठा रही है, उनको अब चुनावी मुद्दा बनाएगी।
केंद्र का प्रतिनिधिमंडल कोटखाई में पीड़ित परिवार से मिलने के लिए दौरा भी कर सकता है। राष्ट्रीय मानवाधिकार और महिला आयोग जैसी संस्थाओं का दखल भी बढ़ेगा। दूसरी तरफ राजभवन ने मामले में हस्तक्षेप कर संकेत दे दिये हैं कि कानून व्यवस्था का मुद्दा बेहद गंभीर है।
अब तक सरकार क्यों मौन
- पूरे प्रकरण में पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठने वाले सवाल
- सीएम की फेसबुक पर कथित आरोपियों के फोटो अपलोड होने का मामला
- पुलिस के अधिकारियों के अलावा किसी अन्य प्रशासनिक अधिकारी का मौके पर न जाना