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गैंगरेप एंड मर्डर: इस तकनीक से पता चलेगा पुलिस की थ्योरी सही या गलत

Sun, 16 Jul 2017 12:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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कोटखाई की गुड़िया की रेप के बाद हुई हत्या की जांच पर उठ रहे सवालों पर डीएनए की रिपोर्ट के बाद ही विराम लग सकता है। पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने अपराध स्वीकार कर लिया है।
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लिहाजा, अब आरोपियों के डीएनए और गुड़िया के शरीर से मिले डीएनए मैच हो जाते हैं तो पुलिस की थ्योरी और दावे सच हो जाएंगे। अगर डीएनए का मिलान नहीं हो पाया तो उनके पब्लिक के आरोप सही हो जाएंगे।


डीएनए के महत्व के बीच शनिवार को पुलिस ने कुछ आरोपियों के डीएनए सैंपल लिए। सूत्रों का कहना है कि पकड़े गए सभी आरोपियों के सैंपल फोरेंसिक लैब जुन्गा भेजे जाएंगे।
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इसके बाद ही पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रही अफवाहों पर विराम लग सकेगा। सूत्रों का कहना है कि पुलिस लगातार दावा करती रही है कि मामले का सही खुलासा हुआ है।
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फोरेंसिक सबूत सामने आने के बाद ही लगेगा चर्चाओं व दावों पर विराम

आरोपियों ने पत्रकारों से बातचीत में भी अपने अपराध को स्वीकारा है। हालांकि, सीएम के फेसबुक पेज पर फोटो डालने और वायरल होने के बाद हटाने की वजह से पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठ रहे हैं।


सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर गुड़िया का शव जंगल में पड़ा था तो दो दिन तक किसी जानवर ने उसे खाया क्यों नहीं। वहीं, शाम को हुई इस वारदात की आवाज किसी को क्यों सुनाई नहीं दी, जबकि पुलिस ने जब सीन री क्रिएट किया तो पास की एक अस्थायी बस्ती से लोगों की आवाज आ रही थी।


जाहिर है गुड़िया ने बचने के  लिए शोर मचाया होगा, तब भी किसी को सुनाई क्यों नहीं दिया। इन सारे सवालों का पुलिस के पास कोई ठोस जवाब नहीं है। यही वजह है कि पुलिस अब सिर्फ डीएनए रिपोर्ट आने का इंतजार कर रही है।
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