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इन्वेस्टर मीट में इसका जिक्र कर लोगों के दिलों को छू गए मोदी, जानिए पीएम के भाषण की 10 खास बातें

Fri, 08 Nov 2019 11:22 AM IST
Krishan Singh अनिमेष कौशल, अमर उजाला, धर्मशाला
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ग्लोबल इन्वेस्ट मीट के मंच से मां ज्वाला के उद्गार से भाषण की शुरुआत कर और हिमाचल से अपनापन दिखाकर दिल को छूने की कोशिश की।

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उन्होंने कहा- मैं जब सोलन जाता हूं तो कई जगह लिखा होता था, मशरूम सिटी में आपका स्वागत है। इसी तरह से लाहौल का आलू, कुल्लूवी शॉल, कांगड़ा की पेंटिंग ये सारी बातें, इनकी अपनी पहचान है, पर बाहर से आने वाले लोगों को इसका कम ही पता है।

इसे प्रमोट करने की जरूरत है। नए तरीके से सोचने की जरूरत है। हिमाचल को अच्छी तरह से जानता हूं। यहां बहुत संभावना है। यहां ट्रिपल आईआईआईटी पर काम हो रहा है, एनआईटी है। यहां के सेब, नाशपाती, टमाटर, गुच्छी, शिमला मिर्च आदि देश के हर कोने में मशहूर हैं। फूड प्रोसेसिंग की जा सकती है।

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हेली टैक्सी योजना को सराहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : ani
हिमाचल की प्रकृति के साथ ही जैविकता जुड़ी है, जितना लाभ सिक्किम ने ऑर्गेनिक खेती से उठाया है, उतना हिमाचल भी उठा सकता है। मैं मानता हूं कि इन अपार संभावनाओं के बीच हिमाचल को आगे बढ़ना होगा। जबसे यहां जयराम सरकार को काम करने का अवसर मिला है, तबसे प्रक्रियाएं और तेज हुई हैं।

पीएम ने कहा - प्रदेश में लंबे अरसे से रेल प्रोजेक्ट फंसे हुए थे। अब हाइड्रो पावर और रिन्यूवल एनर्जी के क्षेत्र में तेजी से काम किया है। उड़ान योजना की तर्ज पर हिमाचल ने हेली टैक्सी योजना चलाई है। रोहतांग सुरंग का काम पूरा हो रहा है। हजारों करोड़ रुपये के निवेश से एनएच का काम हो रहा है। नंगल तलवाड़ा, चंडीगढ़ बद्दी, ऊना-हमीरपुर, भानुपल्ली बिलासपुर रेल लाइनों ने तेजी पकड़ी है।

हिमाचल लघु हिंदुस्तान का एक रूप, इसका लाभ लें

- फोटो : सोशल मीडिया
मोदी बोले - हिमाचल की भाषा की बड़ी विविधता है। एक-दूसरे की बोलियां समझ नहीं आतीं, मगर एक-दूसरे से जबरदस्त जुड़ाव है। यहां साक्षरता दर भी बहुत ऊंची है। यहां के लोगों के भीतर एक स्वाभाविक उद्यमिता भाव है। देश के रक्षा क्षेत्र में हिमाचल का बहुत बड़ा योगदान है। कोई भी परिवार ऐसा नहीं, जिनमें से कोई सेना में न हो।

एक प्रकार से हिमाचल एक लघु भारत है। पूरे हिंदुस्तान का एक रूप है। पूरे भारत की यहां के लोगों में समझ है। यहां के लोग भारत की हर भाषा को समझता है। कोई तमिल तो कोई गुजराती बोल लेता है, क्योंकि वे देश भर में सेवाएं देते रहे हैं। यहां के युवाओं से अधिक से अधिक अवसर लें और इसका लाभ लें।

निवेशक इंतजार करते थे - कौन सा राज्य ज्यादा इंसेंटिव देगा

- फोटो : अमर उजाला
 पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि पहले इस प्रकार के इनवेस्टर सम्मेलन देश के कुछ ही राज्यों में हुआ करते थे। यहां बहुत से साथी ऐसे मौजूद हैं, जिन्होंने पहले की स्थितियां देखी हैं। अब राज्यों में व्यवसाय को आकर्र्िषत करने के लिए एक नई होड़ शुरू  हो गई है। पहले ऐसा था कि कौन सा राज्य ज्यादा चैरिटी करेगा। कौन ज्यादा इंसेंटिव देगा।

बिजली माफ करेगा, तब निवेशक इस इंतजार में रहते थे कि कौन सा राज्य ज्यादा से ज्यादा इंसेंटिव देने जा रहा हैै। हालांकि इस स्पर्धा से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते थे। इन्वेस्टर भी किसी राज्य में निवेश का निर्णय इसलिए टालते रहते थे कि कोई दूसरा राज्य उन्हें ज्यादा संतोष देगा। उन्हें संतोष है कि पिछले कुछ समय में इस बारे में भी आमूल-चूल परिवर्तन आया है। इस तरह की स्पर्धा न तो आज भारत की पहचान पहले से बेहतर बिजनेस फ्रेंडली बनी हुई है। 
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भारत का ईज ऑफ डूइंग में अच्छा स्थान 

पीएम मोदी ने कहा कि भारत का ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में अच्छा स्थान है। हर साल हम तेजी से सुधार कर रहे हैं। रैंकिंग सुधरने का मतलब है कि हमारी सरकार जमीन पर जाकर जमीन की जरूरतों को समझते हुए फैसले ले रही है। साल दर साल नए आयाम जोड़े जा रहे हैं। आज के वैश्विक परिदृश्य में भारत अगर मजबूती से खड़ा है तो इसलिए कि हमने अपनी अर्थव्यवस्था को कमजोर नहीं पड़ने दिया।

आज जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कम से कम तीन प्रतिशत नीचे आ गई है। पीएम ने कहा कि भारत पांच प्रतिशत से अधिक से आगे बढ़ रहा है। हाल ही में आई रिपोर्ट उम्मीद जता रही है कि भारत आने वाले महीनों में और तेजी से आगे बढ़ेगा। हमारी नीयत नेक और संवेदनशील है। हमारे इरादे मजबूत है। जीएसटी, बैंकिंग सुधार जैसे हमने कई बेहतरीन काम किए हैं।

हमने देश को पांच बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का कदम उठाया है। यह लक्ष्य देश के हर राज्य के सहयोग से पूरा होगा। भारत सबसे कम कारपोरेट टैक्स वाली अर्थव्यवस्था बन गई है। कारपोरेट टैैक्स को कम करने का फैसला लिया है। केेंद्रीय मंत्रिमंडल ने मध्य वर्ग के परिवारों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। साढे़ चार लाख परिवारों को घर बनाने के सपनों को पूरा करने में मदद मिली है।
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