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विज्ञान का चौंकाने वाला चमत्कार, पांच माह बाद अपने माता-पिता से मिले नन्हे मासूम

Fri, 28 Oct 2016 11:49 AM IST
अनिमेष कौशल, सुमित ठाकुर/अमर उजाला, शिमला
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खुशी और गम के अजीब माहौल के बीच आखिर पांच महीने बाद अमानत और नितांश अपने असली मां-बाप की गोद में पहुंच ही गए। बच्चों की अदला-बदली करते हुए दोनों माएं दूसरे के जिगर के टुकड़े को सौंपते हुए फफक -फफक कर रो पड़ीं। अमानत की असली मां अंजना तो गश खा गईं।
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एक ही रट लगाकर दोनों बच्चों को उसे सौंपने के लिए अंजना आखिर तक बिलखती रहीं। रोते हुए अंजना बस यही कहती रहीं कि वह अपने बेटे नितांश के बिना नहीं जी सकती। पति जितेंद्र और परिजनों ने नम आंखों से बमुश्किल अंजना की गोद से नितांश को लेकर उसकी असली मां शीतल को सौंपा।

शीतल ने भी रोते हुए अमानत को उसकी मां अंजना को सौंपा। घर के बुजुर्गों और लोगों के समझाने के बाद बिलखतीं माताओं ने एक-दूसरे की गोद में बच्चों को सौंपते हुए दूध और खून के इस रिश्ते को ताउम्र निभाने की बात कही। इससे पूर्व शिमला के खलीनी में अंजना के घर पर अन्नग्रहण रस्म को निभाया गया।

विधिवत पूजा-अर्चना के बाद चांदी के सिक्के से दोनों बच्चों को खीर चटाई गई। दोपहर बाद ढाई बजे बच्चों की अदला-बदली की गई। इस दौरान अंजना, शीतल के साथ-साथ परिजनों समेत वहां मौजूद हरेक की आंखें नम हो गईं। अन्नग्रहण रस्म के दौरान अंजना, उसके पति जितेंद्र, इनके परिजन और कुछ रिश्तेदार शामिल रहे। मंडी से शीतल अपने रिश्तेदारों के साथ इस रस्म में शामिल हुईं।

वीरवार को दोनों परिवार बच्चों की अदला-बदली की सूचना हिमाचल हाईकोर्ट को देंगे। बता दें कि 26 मई को हिमाचल के सबसे बड़े मातृ एवं शिशु अस्पताल केएनएच की गलती से जन्म के बाद दोनों बच्चे बदल गए थे। मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा।

कोर्ट के दखल के बाद दोनों दंपति हाजिर हुए। कोर्ट ने कहा- यह अपने आप में बड़ा विचित्र और तकलीफदेह केस है। आप दोनों खुद अलग कमरे में बैठकर बच्चों की अदला-बदली की तारीख तय कर कोर्ट को बता दें। दोनों दंपति पहली बार एक साथ बैठे और बच्चों की अदला-बदली के लिए 26 अक्तूबर का दिन चुना गया।

... रो मत बेटा, आज एकादशी पर लक्ष्मी घर आई है- पांच महीने बाद एकादशी के दिन अपने घर आई लक्ष्मी रूपी बेटी अमानत का स्वागत मां अंजना ने घर के दरवाजे पर तिलक लगाकर किया। बहन के स्वागत को भाई नैतिक ने खुद गुब्बारे लगाकर घर को सजाया। 

शिमला के भगवतीनगर स्थित कला भवन बुधवार को अन्नग्रहण रस्म के लिए विशेष तौर पर सजाया गया। मेहमानों की आवभगत को शामियाने लगाए गए। चाय-पानी से लेकर खाने तक का इंतजाम जितेंद्र ने अपने घर में किया। घर में बेटी के आने की जहां परिजनों में खुशी दिखी, वहीं पांच महीने तक गले से लगाकर रखे बेटे से बिछड़ने का गम भी सभी के चेहरों पर साफ दिखा।

बुधवार सुबह 11 बजे से जितेंद्र के घर रिश्तेदारों और दोस्तों का आना शुरू हुआ। घर को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया। बेटे नितांश को शीतल को सौंपने की घड़ी जैसे-जैसे नजदीक आ रही थी, मां अंजना की धड़कनें तेज हो रही थीं। अंजना बेटे नितांश को किसी दूसरे को नहीं दे रही थीं। पांच माह बेटे को दूध पिलाने वाली मां आंखों से उसे एक पल के लिए भी आंखों से ओझल करने को तैयार नहीं थीं।

दोपहर बारह बजे पंडित ने जितेंद्र के घर पहुंचते ही पूजा का मंडप सजाया। 12 बजकर 55 मिनट से 3 बजकर 55 तक अन्नग्रहण का शुभ मुहूर्त था। दोपहर करीब डेढ़ बजे जितेंद्र को फोन आया कि मंडी का दंपति खलीणी पहुंच गया है। यह सुनते ही अंजना का बिलखना और तेज हो गया। करीब दो बजे शीतल गोद में अमानत को लेकर जितेंद्र के घर पहुंचीं।

शीतल अपने मां-बाप और कुछ रिश्तेदारों के साथ पहुंचीं। घर पर बेटी के पहुंचने की सूचना मिलते ही अंजना दूसरे कमरे के दरवाजे पर खड़ी होकर बेटी से नजर मिलाने की जुगत करने लगीं। रिश्तेदार और पति के कहने पर अंजना ने कमरे से बाहर आकर बेटी का तिलक कर और शीतल को शक्कर खिलाकर घर में स्वागत किया।

बेटी के घर में प्रवेश करते ही पिता जितेंद्र की आंखें भी नम हो गईं। जितेंद्र ने बेटी को गोद में लेकर उसका माथा चूम कर दुलार किया। उधर, बेटी के बिछड़ने को लेकर शीतल भी उदास दिखीं। करीब सवा दो बजे अन्न ग्रहण की पूजा शुरू हुई। अंजना की गोद में बेटा नितांश बैठा था। वह काफी खुश था। पूजा के दौरान अंजना बार-बार बेटे को देखकर बिलखती रहीं।

अंजना को बिलखता देख पंडित जी ने कहा बेटी रो मत आज एकादशी है, इस दिन लक्ष्मी घर आई है। इसके बाद बेटे को पांच बार चांदी के सिक्के से खीर चटाई। इस रस्म के बाद बेटे नितांश को शीतल को देने को कहा गया। यह सुनते ही अंजना दोबारा जोर-जोर से रोने लगी। इस दौरान पति जितेंद्र सहित परिवार के अन्य सदस्यों ने अंजना को समझा बुझा कर बेटा शीतल की गोद में सौंपा।

इसके बाद बेटी अमानत को अंजना की गोद में दिया। पिता जितेंद्र ने बेटी को चांदी के सिक्के से खीर चटाई। अन्नग्रहण की रस्म पूरी होने के बाद दोनों माताएं कमरे में चली गईं। कमरे में जाकर दोनों ने बच्चों के जागने, सोने के अलावा खाने से संबंधित बातें साझा कीं। शाम करीब सवा छह बजे शीतल और अनिल अपने बेटे को लेकर खलीणी स्थित जितेंद्र के घर से रवाना हुए।
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केएनएच मामला टाइम लाइन

26 मई : केएनएच में शीतल और अंजना की प्रसूति हुई। शीतल को नर्स ने बताया कि उन्हें लड़का हुआ है, जबकि कुछ देर बाद उन्हें लड़की दे दी गई।
13 जून : शिकायतकर्ता शीतल ने बच्चे का डीएनए टेस्ट करवाया।
28 जून : डीएनए रिपोर्ट में मामले का खुलासा हुआ। मेल नहीं खाई रिपोर्ट।
30 जून : शीतल के परिजनों ने केएनएच प्रबंधन से की शिकायत।
13 जुलाई : पुलिस अधीक्षक शिमला से हुई मामले की शिकायत।
14 जुलाई : छोटा शिमला थाना के एसएचओ ने जांच को तलब किए परिजन।
15 जुलाई : पुलिस ने डीएनए टेस्ट करवाया।
28 जुलाई : पुलिस को प्राप्त हुई डीएनए की जांच रिपोर्ट।
04 अगस्त : पुलिस से दोबारा मामले की शिकायत की गई।
27 अगस्त : बच्ची का डीएनए सैंपल लिया गया।
09 सितंबर : डीएनए रिपोर्ट में मां-बाप से मैच नहीं हुए बच्चे के सैंपल।
19 सितंबर : डीएनए जांच के लिए शिमला के दंपति के पुलिस ने लिए सैंपल।
20 अक्तूबर : हाईकोर्ट में खुली डीएनए रिपोर्ट। दूसरे दंपति और बच्चे के मैच नहीं हुए सैंपल।
21 अक्तूबर : हाईकोर्ट में दोनों दंपति 26 अक्तूबर को अन्नग्रहण के लिए बच्चे बदलने को हुए राजी।
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