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Shimla News: किसान सभा के सम्मेलन में स्मार्ट मीटर लगाने का विरोध

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सरकारी जमीन से घरों और जमीन से बेदखली पर रोक लगाने का आग्रह, नीति बनाने की उठी मांग
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रंजीत ठाकुर अध्यक्ष और प्रेम चौहान चुने सचिव
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल किसान सभा के कालीबाड़ी हॉल में आयोजित दो दिवसीय जिला सम्मेलन के दूसरे दिन विभिन्न ब्लॉक से आए 160 किसान प्रतिनिधियों ने भाग लिया और किसानों के हितों की रक्षा के लिए कार्य योजना बनाई। सम्मेलन में बिजली संशोधन बिल 2025 और स्मार्ट मीटर लगाने का भी विरोध किया गया।

सम्मेलन में रंजीत ठाकुर को अध्यक्ष, प्रेम चौहान को सचिव और रमन थारटा को वित्त सचिव चुना गया। इसके साथ ही 45 सदस्यीय जिला कमेटी तथा 17 सदस्यीय कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से गठन किया गया। सम्मेलन में मुख्य रूप से घरों और जमीन से बेदखली पर रोक लगाने तथा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार नीति बनाने की मांग की। केंद्र सरकार द्वारा न्यूजीलैंड, यूरोपियन यूनियन के साथ किए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और अमेरिका के साथ ट्रेड डील से सेब तथा अन्य कृषि उत्पादों की खेती पर आए संकट पर चर्चा की गई और इससे होने वाले नुकसान के बारे में अवगत करवाया गया। सम्मेलन में दूध उत्पादकों की समस्याओं, सब्जी, गुठलीदार फल, पशुपालन, जल विद्युत परियोजनाओं से कृषि क्षेत्र को हो रहे नुकसान, मनरेगा को समाप्त करने, बिजली संशोधन बिल 2025 तथा स्मार्ट मीटर का विरोध किया गया। बीज विधेयक जैसे मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। सम्मेलन में मौजूद किसान नेताओं ने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण इन किसान विरोधी मुद्दों पर भविष्य में किसानों को संगठित कर आने वाले समय में आंदोलन करना होगा। इन सभी मुद्दों को लेकर 24 मार्च को दिल्ली में होने जा रही रैली में सैकड़ों किसान भाग लेंगे।
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संगठनात्मक एकजुटता आवश्यक : सिंघा
सम्मेलन का उद्घाटन पूर्व विधायक राकेश सिंघा के उद्घाटन भाषण से हुआ। उन्होंने वर्तमान दौर में किसानों के सामने खड़ी चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए संगठनात्मक एकजुटता को आवश्यक बताया। जिला सम्मेलन में 12 ब्लॉक समितियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें से 10 ब्लॉक शिमला जिले से और 2 अन्य जिलों से थे। सम्मेलन में संगठन के कार्यों की समीक्षा की गई। दो दिवसीय इस सम्मेलन के दौरान संगठन को और अधिक सशक्त और विस्तारित करने के लिए अग्रणी कार्यकर्ताओं के अनुभवों तथा सुझावों के आधार पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। समापन सत्र में डॉ. ओंकार सिंह शाद, सम्मेलन में अध्यक्ष रंजीत ठाकुर और सचिव प्रेम चौहान ने भी शिरकत की।
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