पर्यावरण मंत्रालय की ओर से गठित क्षेत्रीय प्राधिकार जांच कमेटी ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन का ग्रीन फील्ड में निर्माण करने की सशर्त अनुमति दे दी है। कार्य शुरू करने के लिए एनएचएआई को कमेटी की पांच शर्तों को पूरा करना होगा। इन्हें पूरा किए बिना इस कार्य को शुरू करने की सैद्धांतिक मंजूरी नहीं होगी। इसकी पुष्टि क्षेत्रीय प्राधिकार कमेटी के सदस्य सचिव शशि शंकर ने की है।
क्षेत्रीय जांच कमेटी ने कीरतपुर नेरचौक परियोजना पर संज्ञान लेते हुए कहा कि साल 2014 से अब तक इस फोरलेन में जो भी बदलाव कार्य हुए हैं, एनएचएआई पहले उन्हें वेबसाइट पर डालें। अभी तक एनएचएआई इस परियोजना में किए गए कार्यों को वेबसाइट पर अपलोड नहीं कर रही थी। कमेटी ने आदेश जारी किए कि राज्य सरकार एक प्रमाण पत्र जांच कमेटी और पर्यावरण मंत्रालय को देगी कि इस परियोजना में जो भी बदलाव हुए हैं, यह अंतिम हैं।
कमेटी ने कहा कि यदि इसके बाद इस रूट में किसी बदलाव की संभावना होगी तो जो भी कार्य हुआ है, इसे निरस्त समझा जाएगा। वहीं, राज्य सरकार को बदलाव से संबंधित नई रिपोर्ट मंत्रालय में दाखिल करनी होगी। बैठक में तय किया गया कि राज्य सरकार वन अधिनियम 1980 के पैरा 1.21(3) के तहत बिना भारत सरकार की अनुमति बदले गए रूट व अन्य अनियमितताओं की जिम्मेदार यूजर एजेंसियों पर जुर्माना लगाए। वहीं, इस संबंध में क्षेत्रीय अभिकरण समिति को प्रमाण पत्र दाखिल करना होगा कि राज्य सरकार ने यूजर एजेंसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर दी है।
वहीं, कमेटी ने राज्य सरकार को कहा कि इस परियोजना में बरती गई अनियमितताओं के समय मौजूद अधिकारियों से भी जवाब तलब किया जाएगा। इसके अलावा परियोजना में जो पेड़ बिना गणना और निशानदेही के चिह्नित कर भारत सरकार की मंजूरी के बिना काट दिए गए, राज्य सरकार इसमें विस्तृत जांच कर रिपोर्ट जांच कमेटी के पास जमा करेगी। जब तक उपरोक्त शर्तों की अनुपालना नहीं हो जाती, सैद्धांतिक तौर पर ग्रीन फील्ड में काम करने की मंजूरी नहीं होगी।
ग्रीन फील्ड में फोरलेन निर्माण को अनुमति देना गलत
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि ग्रीन फील्ड में फोरलेन निर्माण को अनुमति देना गलत है। एनएचएआई के पास अप्रूव्ड रोड अलाइनमेंट और असल भूमि अधिग्रहण प्लान नहीं है। बिना अनुमति के अपनी सुविधा के अनुसार रूट को अपने निजी लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए बदला जा रहा है। कहा कि जिस तरह सरकारी भूमि के लिए कमेटी ने शर्तें रखी हैं, वैसे ही निजी भूमि में भी रखी जाएं।