हिमाचल के जनजातीय जिले किन्नौर में एक ऐसी जगह है जहां सिक्का डालने से मन की हर मुराद पूरी होती है। यह मान्यता सदियों से चली आ रही है। ऐतिहासिक किन्नर कैलाश यात्रा सोमवार से शुरू हो गई। पहले दिन 342 लोगों का जत्था यात्रा पर गया। यात्रा 15 अगस्त तक चलेगी। पहले दिन एसडीएम कल्पा डॉ. अवनिंद्र ने श्रद्धालुओं के जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
हिंदू और बौद्ध अनुयायियों की आस्था का केंद्र किन्नर कैलाश किन्नौर जिले में समुद्र तल से 24 हजार फीट ऊंचाई पर स्थित है। यहां शिवलिंग के दर्शन करने को भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई है। पिछले साल पांच हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे। इस बार पहले दिन
342 भक्तों का जत्था यात्रा पर रवाना हुआ। मान्यता है कि पूरे देश में शिव के पांच कैलाश हैं। इनमें एक किन्नर कैलाश किन्नौर जिले के पोवारी गांव से ऊपर स्थित है। अन्य कैलाशों में पहला श्रीखंड कैलाश, दूसरा मणिमहेश, तीसरा मानसरोवर और चौथा आदि कैलाश हैं।
जंगल और दुर्गम रास्तों से पहुंचते हैं भक्त
किन्नर कैलाश स्थित शिवलिंग की ऊंचाई 40 फीट और चौड़ाई 16 फीट है। हर वर्ष अगस्त माह में हजारों शिवभक्त दर्शन करने के लिए जंगल और दुर्गम रास्तों से होकर किन्नर कैलाश पहुंचते हैं। यात्रा शुरू करने के लिए भक्तों को जिला मुख्यालय से करीब सात किलोमीटर दूर राष्ट्रीय उच्च मार्ग-5 स्थित पोवारी से तंगालिगं गांव से जाना पड़ता है।