स्विट्जरलैंड में निर्मित इस प्रूनिंग कैंची का नाम फेल्को-7 है। यह खरीद किन्नौर की कोठी और शिमला के चिड़गांव ब्लॉक की कई पंचायतों में हुई है। कोठी की एक शिकायत तो विभाग को भी पहुंची है। यहां दिसंबर 2025 में टेंडर आमंत्रित किया गया। टेंडर खुलने पर सबसे कम 4,300 रुपये प्रति कैंची की बोली प्राप्त हुई लेकिन इस प्रक्रिया को अचानक रद्द किया गया। इसके बाद बीडीओ कार्यालय ने टेंडर फ्लोट कर निविदाएं मांगी। इसमें सबसे कम दर 5,800 रुपये को मंजूरी दी गई।
पंचायत सचिव एवं खरीद समिति के सदस्य परविंद्र ने कहा कि आशंका थी कि कम कीमत पर घटिया गुणवत्ता की कैंची आपूर्ति की जा सकती है। इसलिए टेंडर रद्द किया गया। बाद में बाजार भाव बढ़ने के कारण करीब 5,800 रुपये की दर को मंजूरी दी गई। उपप्रधान दयाल सिंह नेगी ने बीडीओ कार्यालय को शिकायत देकर खरीद प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं।
वहीं, इस ब्लॉक की रनोल पंचायत के पूर्व सचिव व थाना पंचायत के सचिव विजेंद्र ने बताया कि रनोल में 5000 रुपये की फेल्को -7 कंपनी की 100 कैंचियां खरीदी गई। उन्होंने कहा कि थाना पंचायत में जर्मनी कंपनी की कैंची खरीदी गई। उधर, बीडीओ कल्पा हिमांशी ने कहा कि प्रूनिंग कैंची के टेंडर संबंधी शिकायत पर जांच चल रही है। पंचायत की ओर से पहले किया गया टेंडर रद्द होने के बाद नई निविदाएं जारी की थीं, जबकि टेंडर पंचायत स्तर पर ही खोले गए।
मामला संज्ञान में आया है। यदि जांच में महंगे दामों पर खरीद की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - अनिरुद्ध सिंह, पंचायती राज मंत्री