ब्लड ग्रुप मैच न होने पर किडनी ट्रांसप्लांट तो संभव है, लेकिन इसमें दवाइयों पर करीब पांच से छह लाख रुपये का खर्चा आता है। इस कारण मरीजों पर आर्थिक बोझ भी पड़ता है।
सर्जन की भी है कमी
अस्पताल में इस तरह की सुविधा तो शुरू की जा सकती है, लेकिन दूसरी ओर ट्रेंड सर्जन न होना भी एक समस्या है। बीस से पच्चीस के करीब ट्रांसप्लांट अभी भी एम्स के डॉक्टरों की टीम की निगरानी में किए जाने है। ऐसे में अपने स्तर पर इस तरह के ट्रांसप्लांट करने में अभी समय लगेगा।