देश के महान लेखकों में शुमार खुशवंत सिंह की याद में 14वां खुशवंत सिंह लिटफेस्ट कसौली में शुक्रवार से भक्तिज्ञान की प्रस्तुति और खुशंवत सिंह के बेटे राहुल सिंह के संबोधन के साथ शुरू हो गया। लिटफेस्ट का इस बार का थीम ‘वायस ऑफ टूमॉरो, नेरिगेटिंग दी फ्यूचर थ्रू वर्ल्ड्स’ रखा गया है।
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इसमें देश-विदेश के कई लेखक, साहित्यकार, चित्रकार, अभिनेता, अधिकारी और राजनीति से जुड़ीं हस्तियां भाग ले रही हैं। तीन दिनों तक 30 सत्रों में चर्चा होगी। पहले दिन 10 सत्रों में 11 वक्ता शामिल हुए। लिटफेस्ट की शुरुआत में खुशवंत सिंह के बेटे राहुल सिंह और पत्रकार एवं स्तंभकार बच्ची करकरिया ने कार्यक्रम में उपस्थित मेहमानों का स्वागत किया। वक्ताओं ने खुशवंत सिंह पर अपने-अपने विचार रखे।
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तीन दिन तक 48 से ज्यादा नामचीन हस्तियां शिरकत करेंगी। आगामी दो दिनों में भी कई नामी लेखकों की किताबों पर बार चर्चा होगी। लिटफेस्ट के मुख्य वक्ताओं में कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम, मणिशंकर अय्यर, पूर्व रॉ चीफ एएस दुलत, भारतीय सेना के पूर्व जनरल मनोज मुकुंद नरवणे भी शामिल हैं। इसके अलावा लेखक अधिरथ सेठी, चित्रकार अमोल पालेकर, जर्नलिस्ट चंद्र मोहन, तमिलनाडु की आरजे अनंथी अयप्पन शिरकत करेंगे। कार्यक्रम में फर्स्ट ग्लोबल की संस्थापक देविना मेहरा, शिक्षाविद, रंगमंच निर्देशक फैसल अल्काजी, बीबीसी की पूर्व पत्रकार गिलियन राइट, टीएमसी से पूर्व सांसद जवाहर सरकार उद्बोधन देंगे।
पहले दिन इन्होंने की चर्चा
प्रसिद्ध सामाजिक टिप्पणीकार संतोष देसाई, संगीता वाल्डरन, राइटर्स पॉल वार्टस, अनूप सोनी, अधिरथ सेठी, अमरिंदर बजाज, सोनाली गुप्ता, अभिनेत्री पूजा बेदी, जय किरथ सिंह, रख्शंदा जलिल ने पहले दिन विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। इसमें संतोष देसाई की किताब मैमेज फॉर मम्मी जी पर भी श्रोताओं ने काफी सवाल किए। पॉल वाटर्स की किताब ए हवेली व्होडु़निट पर भी चर्चा हुई।
2012 में हुई थी शुरुआत
इस लिटफेस्ट को वर्ष 2012 में खुशवंत सिंह के जीवित रहते ही उनके बेटे राहुल सिंह ने शुरू किया था। खुशवंत सिंह कसौली को वह दूसरा घर मानते थे और ट्रेन-टू-पाकिस्तान जैसी कई किताबें उन्होंने यहां अपने राज विला में लिखी थी। कोरोना कॉल में यह ऑनलाइन हुआ था। वहीं उसके बाद फिर से यहीं पर आयोजित हो रहा है।