काईसधार में ई-कार्ट सेवा शुरू की गई है जबकि पार्वती घाटी के सुमारोपा, कसोल व खीरगंगा के साथ लगते बिंद्रावनी को कैंपिंग साइटों के लिए चिह्नित किया गया है। इन तीन जगहों पर करीब 500 लोगों के लिए रोजगार के द्वार खुलेंगे। ये सभी स्थल पार्वती नदी के साथ लगते हैं। वैसे भी पार्वती घाटी देशी-विदेशी सैलानियों के लिए यह पंसदीदा सैरगाह है। खासकर यहां इस्रायली सैलानी सबसे अधिक संख्या में आते हैं। इन दिनों भी यहां सैकड़ों की संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं।
वहीं ईको टूरिज्म के तहत कैंपिंग साइटों को सरकार की ओर से स्वीकृति मिलने से सैलानियों और ट्रैकरों को और सुविधा मिलेगी। स्थानीय निवासी बलदेव ठाकुर, विजय सूद, प्रवीण ठाकुर आदि ने कहा कि पार्वती घाटी को ईको टूरिज्म के तहत विकसित करना सरकार की अच्छी पहल है। इससे न केवल युवाओं को घर-द्वार रोजगार मिलेगा, बल्कि पर्यटन कारोबार को भी सुविधा मिलेगी। साथ ही सरकार का भी राजस्व बढ़ेगा।
पार्वती घाटी के कसोल, बिंद्रावनी और सूमारोपा में कैंपिंग साइटों के लिए सरकार ने मंजूरी दी है। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। सरकार की यह पहल स्वागत योग्य है।-किशन ठाकुर, अध्यक्ष मणिकर्ण वैली होटल एसोसिएशन।
ईको टूरिज्म के तहत पार्वती की तीन साइटों को कैंपिंग के लिए फाइनल किया है। अब सैलानी सूमारोपा के साथ बिंद्रावनी में भी रुक सकेंगे। इन साइटों से बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलेगा।--प्रवीन ठाकुर, वनमंडलाधिकारी, पार्वती कुल्लू।