कारगिल में घुसपैठ की सबसे पहले खबर देने वाले सौरभ कालिया और पांच अन्य साथियों के साथ पाकिस्तानी सैनिकों ने बर्बर और अमानवीय यातनाएं दीं। उनके शव क्षत विक्षत कर दिए गए थे।
इसके लिए पिता एनके कालिया देश की सरकारों से लेकर जेनेवा कोर्ट तक का दरवाजा खटखटा चुके हैं। लेकिन, अभी तक उन्हें अपने बेटे से हुए अन्याय को लेकर न्याय नहीं मिल सका है। कहा कि यह मामला अमेरिका जैसे देशों में होता तो आज तक कब की कार्रवाई हो चुकी होती।
डॉ. कालिया को इस बात का मलाल है कि न तो केंद्र की कांग्रेस और न ही भाजपा सरकार से उन्हें अपने बेटे को लेकर न्याय मिला है। उन्हें मोदी सरकार से आस थी कि कारगिल युद्ध में उनके बेटे की पाकिस्तान सैनिकों की ओर से दी गई अमानवीय यातनाओं से हुई मौत का न्याय मिलेगा। लेकिन, अब तक कुछ नहीं हुआ है।
1999 में कारगिल में पाकिस्तानियों की घुसपैठ का पता कैप्टन सौरभ कालिया और उनकी टीम ने लगाया था। इसके बाद पालमपुर के कैप्टन सौरभ कालिया का शव अपने अन्य पांच साथियों के साथ क्षत विक्षत हालत में मिला था।
उनके शरीर के अंगों को पाकिस्तान सेना ने क्षत-विक्षत कर दिया था जो एक सैनिक से नहीं होना चाहिए था। घर में शव पहुंचते ही परिजन शव देखकर दुखी हुए।
इसी के चलते पिता डॉ. एनके कालिया ने मामला भारत सरकार से उठाया था कि एक सैनिक से हुए अमानवीय व्यवहार को लेकर पाकिस्तान का चेहरा दुनिया में नंगा किया जाए और उनका इंसाफ मिले।