शहीद कुलविंदर सिंह। (फाइल फोटो)।
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कारगिल युद्ध में सीना छलनी होने के बाद भी दुश्मनों से डटकर मुकाबला करने वाले सिरमौर के जांबाज राइफलमैन कुलविंदर सिंह की शहादत को भुलाया नहीं जा सकता। धारटीधार क्षेत्र की रामपुर माजरी पंचायत के डोईयोंवाला निवासी जांबाज शहीद कुलविंदर सिंह ने अंतिम सांसों तक दुश्मनों से लोहा लेकर स्वयं वीरगति प्राप्त की।
कारगिल युद्ध के दौरान 14 जून 1999 को तीन घुसपैठियों को अपनी राइफल से मौत की नींद सुलाने के बाद कारगिल के द्रास क्षेत्र की तोलोलिंग चोटी पर दुश्मनों का डटकर सामना करते हुए कुलविंदर ने अपने प्राणों की आहुति दी। छाती पर ब्रस्ट (हथ गोला) लगने से उसी दिन उनकी मौत हो गई। सीना छलनी होने के बावजूद उन्होंने दुश्मनों का डट कर मुकाबला किया।