अभी तक शहीद के नाम का कोई भी शहीदी स्मारक नहीं बन पाया। हालांकि शहीद की माता कमला देवी ने अपने खर्च पर गांव के स्कूल में एक कमरा व बरामदा और गांव पूबोवाल के स्कूल में जहां से मनोहर ने दसवीं कक्षा की परीक्षा पास की थी उसमें दो कमरे व एक बरामदा बनाया। जिसके बाद ही कुठारबीत स्कूल पर शहीद का नाम अंकित किया गया। वहीं, शहीद बेटे के नाम पर एक गेट तक नहीं बनने पर शहीद की माता कमला देवी को अभी भी इस बात का रंज है कि किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया।
निर्माण सामग्री तक उठा कर ले गए लोग
शहीद के पिता ओम प्रकाश राणा ने गांव में आने वाली सड़क पर शहीद के नाम पर गेट का निर्माण भी शुरू करवाया था, लेकिन इस दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद न ही सरकार ने और न ही प्रशासन ने इस गेट के निर्माण कार्य को शुरू करवाने में दिलचस्पी दिखाई। यहां तक कि लोग गेट निर्माण के लिए शहीद के परिजनों द्वारा लाई सामग्री को भी उठाकर ले गए। वहीं, अब सरकार की ओर से शहीद का नाम लेने वाला भी कोई नहीं है। यहां तक कि जन्मदिन और शहीदी दिवस पर भी अब कोई नहीं पूछता है। शहीद का बड़ा भाई मोहन लाल बीएसएफ में कार्यरत है।