एनपीए यानी नॉन परफारर्मिंग असेट्स बेतहाशा बढ़ने से केसीसी बैंक दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गया था। मात्र 8 लोगों को बैंक की ओर से बांटे गए 136 करोड़ रुपये के लोन एनपीए में हैं। पिछले पांच साल में 336 में से 294 लोन बैंक में गलत दिए गए थे। इसी वजह से बैंक को इंटरव्यू लेने के बावजूद कर्मचारियों की भर्ती स्थगित करनी पड़ी।
हालात अभी भी मुफीद नहीं, एनपीए 21 फीसदी पहुंचा
वर्तमान में एनपीए 21 फीसदी पहुंच गया है। यानी, 21 फीसदी ऋणदाता बैंक का लोन वापस नहीं कर रहे हैं। मार्च 2018 में एनपीए 19 फीसदी था। हालांकि, बैंक में पहले एनपीए मैनुअल तैयार किया जाता था। मैनुअल के खेल में बैंक मैनेजर अपनी शाखा को एनपीए में जाने से बचाने के लिए आंकड़ों में हेरफेर कर देते थे।
इस वजह से वित्तीय वर्ष के आखिर में एनपीए का सही आंकड़ा सामने नहीं आ पाता था। अब केसीसी बैंक में एनपीए को आटो मोड पर लाया गया है। यानी, एनपीए को अब कंप्यूटर आटोमैटिक तरीके से आंकता है। आटो मोड भी एनपीए में वृद्धि की वजह माना जा रही है।