इसके बाद भी उन्होंने दौड़ लगाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन गिरने के बाद जतिन फिर उठे और दौड़ने लगे। इसके बाद उनका निधन हो गया। 23 फरवरी को ही घरवालों की इसकी सूचना मिली थी। इस घटना ने पूरे नूरपुर क्षेत्र में शोक की लहर है। जतिन के सम्मान में स्थानीय बाजार भी बंद रहे। जिस स्कूल में जतिन ने शिक्षा प्राप्त की थी। वहां के शिक्षक और विद्यार्थी सड़क के दोनों ओर नायक की विदाई में खड़े थे। जतिन को पढ़ाने वाली एक अध्यापिका अपने आंसू नहीं रोक सकीं। जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और सैकड़ों लोगों की उपस्थिति में जतिन का अंतिम संस्कार हुआ।