कंडा जेल में जब रात को ड्यूटी पर तैनात संतरी सुस्ता रहे थे, ठीक उसी समय जेल में बंद तीन कैदी भागने की योजना में लगे थे। इसी योजना के तहत देर रात को तीनों कैदी सलाखें काटकर जेल से फरार हो गए।
नेपाली मूल के ये कैदी जेल से भागने के बाद किसी भी सूरत में नेपाल पहुंचने की जुगत में थे। इसका रास्ता उन्होंने वाया सुबाथू खोज रखा था। सुबाथू में बड़ी संख्या में नेपाली मूल के लोग रहते हैं।
इनके बीच रहने के लिए ये तीनों सुबाथू के जंगल में पहुंचे थे, लेकिन भूख और ठंड ने इनके हौसले पस्त कर दिए। छह दिसंबर की रात को कैदी कंडा जेल से फरार हुए थे। जंगल के रास्ते सुबाथू के नजदीक रड़ियाणा तक पहुंचे। सात दिसंबर की रात तीनों कैदियों पर भारी रही।
खंडहर में आग जलाकर ठंड से बचने का किया प्रयास
इन्होंने खंडहर में आग जलाकर ठंड से बचने का प्रयास तो किया, लेकिन भूख ने उनके हौसले तोड़ डाले। सबसे पहले प्रेम बहादुर टूटा। वह जंगल से निकलकर सड़क तक आ पहुंचा। यहां पैरापिट पर बैठ गया।
पुलिस की गाड़ी गश्त करते पैरापिट के पास पहुंची तो उसके पास इतनी हिम्मत नहीं बची थी कि भाग सके। पुलिस ने बेहद आसानी से उसे पकड़ लिया। शिमला और सोलन पुलिस के अलावा कैदियों को जेल सुरक्षा कर्मी भी सरगर्मी से खोज रहे थे।
पुलिस ने पकड़े गए कैदी से कड़ी पूछताछ की और अन्य दोनों के छिपे होने के ठिकाने की जानकारी जुटाई। पुलिस ने स्थानीय लोगों से भी रड़ियाणा के जंगल के बारे में पूछताछ की। शुक्रवार शाम तक पुलिस को खबर मिली कि दोनों कैदी झाड़ियों की आड़ में छिपे हैं।
फरार होने के 41 घंटे बाद गिरफ्तारी
पुलिस इन्हें रात का वक्त नहीं देना चाहती थी। एक टीम ने सर्च अभियान छेड़ा और कैदियों तक जा पहुंची। दोनों कैदियों ने भागकर सैन्य छावनी क्षेत्र में घुसने की कोशिश की, लेकिन कंटीली तार में फंसने से पार नहीं जा पाए और पुलिस ने उन्हें दबोच लिया।
पुलिस ने जेल से भागे तीनों कैदियों को करीब 41 घंटे बाद पकड़ा। कैदी छह दिसंबर रात को करीब ढाई बजे जेल से भागे थे। इनमें से एक को पुलिस ने सात दिसंबर रात को करीब ढाई बजे घटना के ठीक चौबीस घंटे बाद पकड़ने का दावा किया है।
अन्य दो की गिरफ्तारी शुक्रवार शाम करीब पांच बजे की है। तीनों को पकड़ने के बाद पुलिस ने कड़ी सुरक्षा में रखा है। उनसे पूरे घटनाक्रम के बारे में पूछताछ की जा रही है।
हरिपुर सायरी में मिला था पहला सुराग
रड़ियाणा से करीब दस किलोमीटर पहले हरिपुर सायरी में पुलिस को कैदियों के बारे में पहला सुराग मिला था। यहां सायरी गांव के कुछ लोगों ने नेपाली मूल के तीन लोगों को जंगल की तरफ जाते देखा था।
जब पुलिस कैदियों की तलाश में वहां पहुंची तो उन्होंने इस बारे में पुलिस को जानकारी दी। इसके बाद एक कैदी की गिरफ्तारी और रड़ियाणा के जंगल में देर रात खंडहर में आग जलने की पुष्टि हुई, जो पुलिस के लिए मददगार बनी।
सुबाथू तक जंगल का रास्ता जानते थे कैदी
तीनों कैदी जंगल से होते हुए गंबर और सुबाथू तक पहुंचने का मार्ग जानते थे। नेपाली मूल के कैदियों में से एक कुछ समय पूर्व गंबर में मजदूरी का काम कर चुका है। अनुमान है कि जेल से भागने के बाद इन कैदियों ने जंगल को ही अपना रास्ता बनाया था।
इस दौरान इन्हें खाने-पीने के लिए कुछ नहीं मिल पाया। फरार होने की घटना के बाद इनकी भूख और प्यास ही गिरफ्तारी की एक बड़ी वजह के रूप में अब तक सामने आ रही है।
एसपी सौम्या ने दी पुलिस टीम को बधाई
शिमला पुलिस अधीक्षक सौम्या ने पुलिस की टीम को बधाई दी है। कैदियों की गिरफ्तारी के पूरे अभियान के दौरान एसपी सौम्या टीम के साथ मौजूद रहीं। उन्होंने देर शाम सुबाथू चौकी पहुंचकर हालात का जायजा लिया। कहा कि पुलिस को पल-पल का अपडेट मिलता रहा। लोगों का भी सहयोग मिला, जिस वजह से तीनों कैदी पकड़े गए हैं।