फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गजब परंपरा: गांव में बारिश करवाने के लिए इस शख्स की होगी परीक्षा, नहीं हुई तो जाएगी कुर्सी

Wed, 06 Dec 2017 09:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मंडी/गोहर
विज्ञापन
विज्ञापन
द्वापर युग से चली आ रही यह परंपरा आज भी जीवंत है। गांव में बारिश करवाने के लिए इस शख्स की परीक्षा होती है। देवभूमि हिमाचल में किसान-बागवान दैवीय शक्तियों को प्रसन्न कर बारिश की गुहार लगा रहे हैं।
विज्ञापन


द्वापर युग से चली आ रही यह प्रथा मंडी जिले की कमरूघाटी में आज भी जीवंत है। दिसंबर 2017 तक बारिश न होने पर किसानों ने बड़ा देव कमरूनाग की शरण में जाने की तैयारी की है।

वे देवता के गूर लीलमणी की परीक्षा लेने की रणनीति बना रहे हैं। गूर के माध्यम से किसान-बागवान देवता से बारिश मांगते हैं। अगर गूर बारिश देने में असफल रहता है तो उसकी कुर्सी छीन ली जाती है। बारिश का परता (पूछ) देने वाले गूर की ताजपोशी की जाती है। वर्तमान में कमरूनाग देवता के गूर की गद्दी पर लीलमणी विराजमान हैं। 
विज्ञापन

धरना-प्रदर्शन करने की तैयारी

अगले चार दिन तक क्षेत्र के सैकड़ों किसान-बागवान बारिश के लिए देवता के निवास स्थान कांढी कमरूनाग में गूर के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करेंगे। बारिश न होने पर करीब चार माह से खेत और बगीचे सूखे की चपेट में हैं।

गंदम की बिजाई रुक गई है। सेब बागवान बगीचों में गोबर खाद नहीं डाल पा रहे हैं। देव कमरूनाग का गूर लाठी परिवार से चुना जाता है। लाठी वर्ग की एक टोली होती है। इसके सदस्य देव कमरूनाग के गूर के रूप में माने जाते हैं। 

बारिश का देव है कमरूनाग

कमरूनाग झील तक मंडी के रोहांडा नामक स्थान से 6 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई चढ़ने के बाद पहुंचा जा सकता है। यह समुद्रतल से 9000 फीट ऊंचाई पर सरनाहुली में स्थित है। झील के साथ देव कमरूनाग का प्राचीन मंदिर है।

ले सकते हैं परीक्षा 
नाचन फ्रूट ग्रोवर एसोसिएशन के प्रधान प्रेम ठाकुर ने कहा कि किसानों को बारिश की सख्त जरूरत है। ऐसे में दो-तीन दिन में किसान कांढी कमरूनाग में देवता से बारिश के लिए गूर लीलमणी की परीक्षा ले सकते हैं। 

यह है परंपरा

पूर्व कारदार कमरूनाग कमेटी निर्मल सिंह ठाकुर का कहना है कि जब भी सूखा पड़ता है तो किसान देव कमरूनाग के दरबार में आते हैं। गूर के माध्यम से धूप जलाकर देवता से बारिश का परता मांगते हैं।

कमरूदेव को महाभारत काल का देवता माना जाता है। इसका उल्लेख महाभारत में भी है। जब रत्न यक्ष कौरवों के पक्ष में पांडवों के खिलाफ युद्ध के लिए रवाना हुआ था तो श्रीकृष्ण ने रास्ते में छल से उसका सिर मांग लिया था।

रत्न यक्ष ने शर्त रखी थी कि महाभारत का युद्ध मैं भी देखूंगा। इस पर श्रीकृष्ण ने उसका सिर कमरूनाग स्थित सबसे ऊंची चोटी पर रख दिया। कहा जाता है कि कमरूनाग को इंद्र देव ने बारिश का वरदान दिया है।
विज्ञापन

गूरों के खिलाफ जारी रहेगा धरना-प्रदर्शन

किसानों-बागवानों में दीवान चंद ठाकुर, दीनानाथ, मेघसिंह, परमाराम, देवीराम, कृष्ण कुमार, दीपक ठाकुर, मुरारी लाल, हेम सिंह और फता सिंह ने बताया कि अगर देव कमरूनाग के गूर बारिश नहीं करवाते हैं तो उनका धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा।

उधर, बड़ा देव कमरूनाग के गूर लीलमणी ने बताया कि उम्मीद है कि देव कमरूनाग जल्द कृपा करेंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें