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चित्रों से कालका-शिमला रेल लाइन का इतिहास जानेंगे लोग

Mon, 26 Oct 2020 10:30 AM IST
अरविन्द ठाकुर विश्वास भारद्वाज, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
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- फोटो : अमर उजाला
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राजधानी शिमला के स्थानीय लोग और बाहरी राज्यों से आने वाले सैलानी अब कालका-शिमला हेरिटेज रेलवे ट्रैक के इतिहास की जानकारी चित्रों के माध्यम से भी प्राप्त कर सकेंगे। शिमला के ओल्ड बस स्टैंड स्थित बाबा भलखू रेल संग्रहालय के बाहर ओपन एयर म्यूजियम की दीवारों पर भीत्ति चित्र बनाने का काम पूरा हो गया है। कालका शिमला हेरिटेज रेलवे ट्रैक के इतिहास और शिमला शहर की खूबसूरती को  चित्रों के जरिये यहां खूबसूरत तरीके से दीवारों पर उकेरा गया है।

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रेलवे बोर्ड के सदस्य राजेश अग्रवाल ने बाबा भलखू रेल संग्रहालय का निरीक्षण करने के बाद रेल अधिकारियों को रेल संग्रहालय को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए ओपन एयर म्यूजियम बना कर दीवारों पर कालका-शिमला हेरिटेज रेलवे ट्रैक के इतिहास और शिमला शहर की खूबसूरती से जुड़े भित्ति चित्र बनाने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद कुशल कारीगरों की मदद से ओपन एयर म्यूजियम में दीवारों पर चित्र उकेरे गए हैं।

आर्च शैली में निर्मित चारमंजिला पुल में 34 मेहराबें हैं। यह इंडियन रेलवे में आर्च गैलरी के सबसे बेहतर पुलों में शामिल है। कालका-शिमला हेरिटेज रेलवे ट्रैक पर 1903 में चलाया गए स्टीम इंजन केसी 520 को भी चित्र के माध्यम से दीवारों पर उकेरा गया है। 117 साल पुराने इस स्टीम इंजन के साथ सफर करने के लिए अभी भी विदेशों से अंग्रेज शिमला आकर बुकिंग करवाते हैं। इसके अलावा शिमला से दिखने वाले बर्फ से ढके पहाड़, रिज मैदान स्थित चर्च और एक चरवाहे को भी चित्र के माध्यम से रेल संग्रहालय की दीवारों पर दर्शाया गया है।
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रेल म्यूजियम की एंट्री पर स्टीम इंजन का प्रारूप
रेल म्यूजियम के एंट्री प्वाइंट को आकर्षक बनाने के लिए  स्टीम इंजन का रूप दिया गया है। म्यूजियम के एंट्री प्वाइंट पर लगाया गया स्टीम इंजन का प्रारूप हूबहू 117 साल पुराने स्टीम इंजन की तरह ही दिखता है। मॉडल के भीतर असली स्टीम इंजन की तरह ही कल पुर्जे लगाए गए हैं, जिससे मॉडल में प्रवेश करने पर असली स्टीम इंजन जैसा आभास होता है।

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