विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त कालका-शिमला रेलमार्ग पर यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक अत्यंत राहत भरी खबर है। रेलवे ने गुरुवार से इस महत्वपूर्ण रूट पर 'मिक्स अप-डाउन' ट्रेन का संचालन फिर से शुरू कर दिया है। समर सीजन के दौरान चलाई गई विशेष ट्रेनों की अवधि समाप्त होने के बाद, इसे एक नियमित सुविधा के रूप में पुनः पटरी पर उतारा गया है, जिससे स्थानीय निवासियों और पर्यटकों दोनों को काफी सुविधा मिलेगी।
विस्तृत समय-सारिणी और किफायती यात्रा
रेलवे की ओर से जारी की गई नई समय-सारिणी के अनुसार, छह कोचों वाली यह मिक्स ट्रेन अब प्रतिदिन कालका से सुबह 8:00 बजे रवाना होगी और दोपहर 1:55 बजे शिमला पहुंचेगी। वापसी यात्रा में, यही ट्रेन शाम 5:00 बजे शिमला से प्रस्थान करेगी और रात 10:22 बजे कालका पहुंचेगी।
इस ट्रेन की सबसे आकर्षक बात इसका किराया है, जो मात्र 50 रुपये निर्धारित किया गया है। ट्रेन की सभी बोगियां जनरल श्रेणी की होंगी, जिससे आम यात्रियों को कम खर्च में इस खूबसूरत और ऐतिहासिक रेलमार्ग पर यात्रा करने का अवसर मिलेगा। कम किराए के कारण, यह सेवा दैनिक यात्रियों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और विशेष रूप से हिमाचल की यात्रा करने वाले पर्यटकों के लिए एक बेहद उपयोगी और किफायती विकल्प साबित होगी।
सभी स्टेशनों पर ठहराव: एक महत्वपूर्ण सुविधा
इस मिक्स ट्रेन की एक और बड़ी खासियत यह है कि यह कालका और शिमला के बीच स्थित सभी छोटे-बड़े रेलवे स्टेशनों पर रुकेगी। इसका अर्थ है कि बीच के स्टेशनों से यात्रा करने वाले यात्रियों को अब अलग से सीट आरक्षित कराने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यह सुविधा स्थानीय लोगों के लिए आवागमन को और भी सुगम बनाएगी और उन्हें नियमित रेल सेवा का लाभ उठाने में मदद करेगी।
पर्यटन को बढ़ावा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति
कालका-शिमला रेलमार्ग भारत के सबसे लोकप्रिय और दर्शनीय पर्वतीय रेल मार्गों में से एक है। प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में पर्यटक इस अनूठे टॉय ट्रेन अनुभव का आनंद लेने के लिए यहां आते हैं। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इस मिक्स ट्रेन के पुनः शुरू होने से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि यह क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति प्रदान करेगा। इससे स्थानीय व्यवसायों और कारोबार को भी लाभ पहुंचने की उम्मीद है।
विश्व धरोहर रेलमार्ग की अनूठी पहचान
लगभग 96 किलोमीटर लंबे कालका-शिमला रेलमार्ग का निर्माण ब्रिटिश काल में किया गया था। यह संकरी रेल लाइन अपनी 100 से अधिक सुरंगों, सैकड़ों पुलों और चारों ओर फैले पहाड़ों के मनमोहक दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। इन सभी विशेषताओं के कारण, यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर का दर्जा प्रदान किया है, जो इसे दुनिया के सबसे खूबसूरत और ऐतिहासिक रेल सफरों में से एक बनाता है।