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जेपी नड्डा बोले- डॉक्टरों की जिम्मेदारी, लोगों को बीमार ही न होने दें

Tue, 15 May 2018 09:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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जेपी नड्डा ने सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात के दौरान संचार जोखिम पर दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला के शुभारंभ किया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि चिकित्सा जगत से जुड़े विशेषज्ञों और आम लोगों के बीच संवाद की बड़ी कमी है।

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 डॉक्टरों को भी अपनी क्षमता की सही जानकारी नहीं है। बेशक, वे लोगों को बेहतर उपचार सेवाएं दे रहे हैं। कहा कि बेशक चिकित्सकों पर काफी बड़ी जिम्मेवारी है और वे काफी व्यस्त रहते हैं, लेकिन बीमारियों का इलाज करने से बेहतर वे लोगों को बीमार ही न होने दें।

इस दिशा में संवाद और संचार करने की नितांत जरूरत है। यह बात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने सोमवार को शिमला में सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात के दौरान संचार जोखिम पर दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला के शुभारंभ पर कही।
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कहा कि पिछले कुछ दशकों में विश्व के कुछ देशों में इबोला, इन्फ्लूएंजा, जिका वायरस, स्वाइन फ्लू जैसी महामारियों ने अचानक जन्म लिया और देशों की आर्थिकी एवं सामाजिक परिवेश को प्रभावित किया।

संचार जोखिम पर सामरिक निर्देश पत्रिका तथा सीडी का विमोचन किया

इनसे निपटने में संचार, मीडिया की भूमिका, हितधारकों की सक्रियता, पंचायतीराज, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम जनमानस की भूमिका अहम है। इससे पूर्व उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात के दौरान संचार जोखिम पर सामरिक निर्देश पत्रिका तथा सीडी का विमोचन किया।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा आयुर्वेद मंत्री विपिन परमार ने कहा कि हिमाचल के लिए आज ऐतिहासिक दिन है। उत्तर क्षेत्र के लिए आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत प्रदेश की राजधानी शिमला से हुई, जो गरीब लोगों को पांच लाख का स्वास्थ्य छत्र प्रदान करेगी। 
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ये भी रहे मौजूद

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव प्रीति सुडान, महानिदेशक केेंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय डा. प्रोमिला गुप्ता, निदेशक एनसीडीसी डा. एसके सिंह ने कार्यशाला के उद्देश्य, संचार की आवश्यकता और अन्य विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।

इससे पूर्व स्वास्थ्य निदेशक डॉ. बलदेव ठाकुर ने स्वागत किया। शिमला के सांसद वीरेंद्र कश्यप, मुख्य सचिव विनीत चौधरी, प्रधान सचिव स्वास्थ्य प्रबोध सक्सेना, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक और विश्व स्वास्थ्य संगठन के अधिकारी भी उपस्थित थे।
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