इस योजना का लाभ देश की 40 फीसदी जनता को मिलना है। मरीजों के लिए यह योजना पेपरलेस, कैशलेस होगी। इसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के सभी लाभ भी देय होंगे और 1352 तरह के उपचार शामिल होंगे।
इसका 60 फीसदी खर्च केंद्र और 40 फीसदी राज्य सरकारों को उठाना है। योजना को लागू करने से पहले देश भर में इस तरह की पांच कार्यशालाएं होंगी। योजना से देशभर के 10 करोड़ परिवार लाभान्वित होंगे।
कार्यशाला के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि ‘आयुष्मान भारत’ विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना है। इससे देशभर में स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति आएगी। इसकी समूची आईटी प्रणाली जून महीने तक तैयार होगी। जुलाई माह में इस योजना को टेस्ट पर डाला जाएगा। ‘
आयुष्मान भारत’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच है। नड्डा ने कहा कि देश भर के लोगों को उनके घरों के नजदीक बेहतर स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए देशभर में 20 एम्स खोले जा रहे हैं। देश भर के 1.50 लाख स्वास्थ्य उप केंद्रों को बीमारियों की शीघ्र पहचान के लिए वैलनेस केंद्रों में बदला जाएगा।
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री बह्म मोहिंद्रा पीटरहॉफ शिमला में आयोजित कार्यशाला को बीच में छोड़कर ही चले गए। एमओयू साइन न करने पर उन्होंने कहा कि अभी कई मुद्दों पर केंद्र सरकार से पहले बात की जानी है, तभी हस्ताक्षर होंगे।
सोमवार को कंपीटेट अधिकारी साथ नहीं होना भी उन्होंने करार पर हस्ताक्षर न कर पाने का कारण बताया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पीएस रावत, पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बह्म मोहिंद्रा, हिमाचल के स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार, केंद्रीय
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव प्रीति सुडान, नीति आयोग स्वास्थ्य के सदस्य डॉ. वीके पॉल, राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. इंदुभूषण, प्रधान सचिव स्वास्थ्य प्रबोध सक्सेना आदि ने भी अपने विचार रखे।