वित्त वर्ष 2016-17 के वार्षिक बजट में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह सरकारी नौकरियों का पिटारा खोल सकते हैं। अगले साल प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर सीएम बजट घोषणाएं कर सकते हैं। मुख्यमंत्री पहले ही हिमाचल में दो साल में 25 हजार सरकारी नौकरियां देने का वादा कर चुके हैं। नए वार्षिक बजट में इस एलान की छाया नजर आ सकती है।
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सीएम वीरभद्र सिंह सरकारी कर्मचारियों और कामगारों की कई श्रेणियों के वेतन और मानदेय में बढ़ोतरी की भी घोषणा कर सकते हैं। वीरभद्र आठ मार्च को अपने कार्यकाल का 19वां बजट पेश करेंगे। राज्य सरकार के सामने एक ओर हिमाचल के युवाओं और तमाम वर्गों से समय-समय पर किए गए वादे निभाने की मजबूरी है तो दूसरी ओर सूबे के सीमित संसाधन हैं।
हजारों करोड़ रुपये के कर्ज में डूबी सरकार इस बार क्या कौशल दिखाएगी, इस पर तमाम वर्गों की नजरें गड़ी हैं। हिमाचल की 12वीं विधानसभा का कार्यकाल दिसंबर 2017 में पूरा हो जाएगा। इस स्थिति में सरकार को जो कुछ भी करना है, उसे दो वार्षिक बजट घोषणाओं में करना होगा। वित्त वर्ष 2017-18 की बजट घोषणाओं को लागू करने के लिए सरकार के पास लगभग छह-सात महीने का समय ही होगा।
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उसके बाद अगले विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लग सकती है। ऐसे में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की ओर से इस बार आठ मार्च को की जा रही वित्त वर्ष 2016-17 की बजट घोषणाएं ही अहम मानी जा रही हैं। आठ मार्च, 2016 की बजट घोषणाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए ही हिमाचल सरकार के पास पर्याप्त समय होगा।
25 फरवरी को शुरू हुई प्रदेश की 12वीं विधानसभा का यह 11वां सत्र 25 फरवरी से शुरू होकर सात अप्रैल को समाप्त होगा। इसमें कुल 25 बैठकें निर्धारित हैं। मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के आगामी बजट भाषण पर चर्चा कर इसे स्वीकृति दे दी है। हालांकि, प्रदेश वित्त विभाग इसमें मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देशानुसार आंशिक संशोधन में जुटा हुआ है। इसके लिए राज्य सचिवालय में पिछले कुछ दिनों से बैठकों के कई दौर चले हुए हैं।
राजधानी के लिए पिछले बजट में स्वास्थ्य, परिवहन और कारोबार को लेकर बड़ी घोषणाएं की गई थीं। ये आज तक धरातल पर नहीं उतरी हैं।
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आम बजट से जुड़ी हैं ये बड़ी उम्मीदें
प्रदेश सरकार मंगलवार को हिमाचल का आम बजट पेश करेगी। जनता बजट से कई उम्मीदें लगाई बैठी है। पिछले बजट की घोषणाओं पर नजर डालें तो अधिकतर अधूरी हैं। राजधानी के लिए पिछले बजट में स्वास्थ्य, परिवहन और कारोबार को लेकर बड़ी घोषणाएं की गई थीं। आईजीएमसी में ट्रामा सेंटर, शिमला में ट्रैफिक की समस्या हल करने के लिए ढली और लक्कड़ बाजार में बस अड्डा, शिमला शहर में स्थित सब्जी और अनाज मंडी को शिफ्ट करने की घोषणा आज तक धरातल पर नहीं उतरी हैं।
मर्ज एरिया को तीन करोड़, पर हालात वही
बजट में मुख्यमंत्री ने नगर निगम के मर्ज एरिया वार्डों को विकास के लिए तीन करोड़ रुपये की ग्रांट जारी करने का एलान किया था। ग्रांट की घोषणा के बावजूद मर्ज एरिया वार्डों के हालात जस के तस हैं। ढली, मल्याणा, चमियाणा, कुसुम्पटी, और पटियोग (न्यू शिमला) के लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
सुपर स्पेशियेलिटी ब्लॉक भी खटाई में
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने 150 करोड़ की लागत से आईजीएमसी के लिए सुपर स्पेशियेलिटी ब्लॉक बनाने की घोषणा अपने बजट भाषण में की थी। एक साल बाद ब्लॉक बनना तो दूर महज खुदाई का ही काम शुरू हो पाया है। पिछले साल बजट से पहले ही सुपर स्पेशलिटी वार्ड की ड्राइंग बना दी गई थी। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से इसके लिए बजट भी जारी कर दिया गया था।
परिवहन, संचार सेवाएं और कृषि को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हाल ही में आयोजित योजना बोर्ड की बैठक में प्रदेश सरकार ने वर्ष 2016-17 के लिए 5200 करोड़ रुपये की वार्षिक योजना को मंजूरी दी है। इसमें बनाए गए योजना आकार की झलक भी नए बजट में नजर आ सकती है। नए योजना आकार में सामाजिक सेवा क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई है और इस क्षेत्र के लिए 1992 करोड़ रुपये यानी कुल योजना आकार का 38.31 प्रतिशत बजट देने को मंजूरी दी गई है।
प्राथमिकता के क्रम में परिवहन और संचार सेवाओं के लिए 979.04 करोड़ रुपये देने प्रस्तावित किए गए हैं। येे वार्षिक योजना का 18.83 प्रतिशत हैं। कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए 586 करोड़ रुपये यानी 11.26 प्रतिशत बजट खर्च होगा। ऐसे में सीएम के बजट भाषण में भी सामाजिक सेवा क्षेत्र, परिवहन, संचार सेवाओं, कृषि क्षेत्र आदि के लिए अधिक धन का प्रावधान हो सकता है।