जतिंद्र ने स्वरोजगार अपनाकर दूसरों को भी दिया रोजगार
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हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के रहने वाले जतिंद्र सिंह ने 12वीं कक्षा की पढ़ाई करने के बाद मिठाई के डिब्बे बनाने का कार्य शुरू किया। मिठाई के डिब्बे बनाने के दौरान उनके मन में कुछ नया करने की सोच पैदा हुई और उन्होंने पर्यावरण मित्र कैरी बैग बनाने का मन बनाया ताकि खुद का रोजगार शुरू कर अन्य बेरोजगारों युवाओं को भी रोजगार उपलब्ध करवाया जा सके। जतिंद्र सिंह ने बताया किजैसे ही सरकार ने पॉलिथीन बंद करने का निर्णय लिया था, 2018 में जतिंद्र सिंह ने कैरी बैग बनाने की शुरुआत की ताकि लोगों की समस्या का समाधान किया जा सके और उन्हें पर्यावरण मित्र कैरी बैग उपलब्ध करवाए जा सके। यूनिट शुरू करने के लिए वह उद्योग विभाग के महाप्रबंधक से मिले तथा कैरी बैग के बारे में चर्चा की। विभाग की ओर से उन्हें उद्योग स्थापित करने के बारे में पूर्ण जानकारी दी और 50 प्रतिशत अनुदान राशि पर उन्हें बसाल में प्लॉट के लिए उपलब्ध करवाई।
वर्तमान में जतिंद्र सिंह ने कैरी बैग यूनिट में 42 अन्य लोगों को भी रोजगार दिया है। उन्होंने बताया कि यूनिट में लगभग 80 प्रतिशत कार्य करने वाले लोग हिमाचली हैं, जिन्हें घरद्वार पर ही रोजगार उपलब्ध हुआ है। इसके अतिरिक्त जतिंद्र अन्य 10-12 लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करवा सकते हैं। उन्होंने बताया कि कैरी बैग बनाने का कच्चा माल नजदीक बद्दी और नालागढ़ से ही मिल जाता है। कैरी बैग की बिक्री हिमाचल और पंजाब से आसानी से हो जाती है। कैरी बैग समय की मांग है और लोगों की जरूरत भी है। उन्होंने बताया कि उनका सालाना टर्नओवर लगभग 20 करोड़ रुपये हैं और कैरी बैग बनाने का कार्य बढ़िया ढंग से चल रहा है। जतिंद्र ने कहा कि उन्हें खुशी होती है कि स्वरोजगार से आत्मनिर्भर बनकर दूसरों को भी रोजगार उपलब्ध करवाने का मौका मिला। इसके अतिरिक्त उन्होंने कहा कि प्लॉट की किस्तों का भुगतान भी समय कर दिया है। जतिंद्र सिंह ने जिला के युवाओं से आह्वान किया कि वे सरकारी नौकरी के पिछे न भाग कर प्रदेश सरकार की ओर से बेरोजगार युवाओं के लिए स्वरोजगार के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ लें। यूनिट में काम करने वाले लोगों ने बताया कि पहले वे घर से दूर नौकरी करते थे। लेकिन वर्तमान में घर के समीप ही कैरी बैग यूनिट में रोजगार मिला है यहां पर सभी बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं ।