जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद -370 हटाए जाने को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने ऐतिहासिक बताते हुए केंद्र सरकार को बधाई दी। मानसून सत्र के दूसरे दिन मुख्यमंत्री ने वक्तव्य देकर कहा कि आजादी से पहले की 562 रियासतों को उस समय के गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को एक सूत्र में पिरोने की जिम्मेदारी दी गई, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया।
लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने जिस जम्मू-कश्मीर को अपना राज्य बताते हुए खुद हल करने की बात कही थी, वह इस अनुच्छेद- 370 के हटने से पहले तक देश के लिए नासूर बन गया था। समाधान के बजाय अनुच्छेद-370 देकर उन्हें विशेष दर्जा दे दिया गया, जिसकी वजह से वह हमेशा देश से अलग ही रहे।
वहां पर दो निशान, दो प्रधान की परंपरा भी उसी वजह से आई। साथ ही महिलाओं, सफाई कर्मियों, पाकिस्तान से बंटवारे के समय आकर बसे लोगों तक को परेशानी का सामना करना पड़ा। रणवीर पेनल कोड के बजाय भारत की आईपीसी लागू नहीं हो पाई और वहां जाने के लिए परमिट तक लेना पड़ता था। इसी व्यवस्था को बंद करने के लिए जनसंघ के अध्यक्ष श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बिना परमिट कश्मीर में प्रवेश किया जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और बाद में जेल में रहते हुए ही उनकी मौत हो गई।
इसी के बाद आंदोलन हुआ जिसकी वजह से परमिट व्यवस्था को बंद किया गया। कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सत्तर दिन से कम के कार्यकाल में गृह मंत्री अमित शाह ने 370 को खत्म करने का साहसिक कार्य कर दिखाया। केंद्र के इस नेतृत्व के बाद सही मायने में कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक हुआ है और अब पूरे देश में एक निशान एक संविधान लागू हो गया है।