देश में पहली बार ई-मुलाकात के लिए प्रदेश कारागार विभाग की ओर से लागू किए गए जेल वार्ता साफ्टवेयर को अब दूसरे राज्य भी अपनाने की तैयारी में हैं। हिमाचल ने अपनी जेलों में जेल वार्ता शुरू कर बंदियों की ऑनलाइन मिलाई तथा अधिकारियों को ऑनलाइन पूछताछ की सुविधा मुहैया कराई है।
करीब दो साल पहले शुरू हुई इस व्यवस्था से अब तक एक हजार लोगों को जेलों में बंद अपने परिचितों से ऑनलाइन बात करने का मौका मिला। जांच अधिकारियों को भी कोर्ट से परमिशन लिए बिना ही अंडर ट्रायल बंदियों से पूछताछ करने की सुविधा मिल गई है। अब देश के कई राज्य इस योजना को समझ रहे हैं।
कुछ प्रदेश तो इस सॉफ्टवेयर को लागू करने की तैयारी भी कर चुके हैं। गुजरात के अधिकारी जेल वार्ता साफ्टवेयर के काम करने के तरीके और उससे होने वाले फायदे का अध्ययन करने आए थे। गुजरात के बडोदरा केंद्रीय कारागार के अधीक्षक आईपीएस आरएफ सागडा ने प्रदेश की सेंट्रल जेल कंडा का दौरा भी किया। इस दौरान साफ्टवेयर के काम करने का तरीका सीखा और समझा भी।
कई प्रदेशों के अधिकारी संपर्क में- गुजरात, यूपी जैसे कई राज्यों के जेल अधिकारी अपनी जेलों में बढ़ते बोझ को कम करने के लिए हिमाचल के जेल वार्ता में साफ्टवेयर में रुचि दिखा रहे हैं। एसपी जेल मुख्यालय आरएस भाटिया ने इसकी पुष्टि की है।
एनआईसी ने बनाया है प्रोग्राम- जेल वार्ता प्रोग्राम को जेल विभाग ने नेशनल इनफार्मेशन सेंटर की मदद से तैयार किया है। साफ्टवेयर के माध्यम से इंटरनेट तथा वेबकैम युक्त कंप्यूटर से कोई भी व्यक्ति जेल में बैठे अपने परिचित से वार्ता कर सकता है।
जांच अफसरों को मिला फायदा- अब जांच अधिकारी अंडर ट्रायल बंदियों से सवाल जवाब करते हैं और उन्हें इसके लिए कोर्ट की मंजूरी भी नहीं लेनी पड़ती। साथ ही जेल में आने और उन पर नजर रखने तथा नियंत्रण करने को लेकर कारागार विभाग पर दबाव नहीं रहता।