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Shimla News: चिट्टा तस्करी के मामले में आरोपी को तीन साल का कठोर कारावास

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विशेष न्यायाधीश-1 एनडीपीएस प्रवीण गर्ग की अदालत ने सुनाया फैसला, दो आरोपियों को किया बरी
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वर्ष 2021 में हीरानगर के समीप एचआरटीसी की बस में बैठे युवक की तलाशी में पकड़ा था 19.52 ग्राम चिट्टा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। चिट्टा तस्करी के मामले में अदालत ने एक आरोपी को तीन साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने 19.52 ग्राम हेरोइन (चिट्टा) की बरामदगी के मामले में मुख्य आरोपी गौरव को धारा 21 के तहत दोषी करार दिया है। विशेष न्यायाधीश-1 (एनडीपीएस) प्रवीण गर्ग की अदालत ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी पूरव ठाकुर और सूरज शर्मा को धारा 29 (आपराधिक षड्यंत्र) के आरोप से बरी कर दिया। गौरव को भी धारा 29 से बरी किया गया है।
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जानकारी के अनुसार 19 अगस्त 2021 की शाम करीब 6:20 बजे शिमला के हीरानगर के समीप शरोग वाइफरकेशन के पास पुलिस ने बिलासपुर से आ रही एचआरटीसी बस एचपी-25ए-1882 की चेकिंग की। इस दौरान बस में सीट नंबर 24 पर बैठे गौरव से 19.52 ग्राम हेरोइन/चिट्टा बरामद हुआ। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सस्टांस एक्ट (एनडीपीएस) के तहत थाना बालूगंज में एफआईआर दर्ज की। जांच के दौरान पुलिस ने गौरव की निशानदेही पर पूरव ठाकुर और सूरज शर्मा को भी गिरफ्तार किया। आरोप था कि तीनों ने मिलकर हेरोइन की तस्करी की साजिश रची थी। अदालत में गौरव पर धारा 21 एनडीपीएस के तहत दोष सिद्ध हुआ। अदालत ने पाया कि बरामदगी उसके एक्सक्लूसिव और कॉन्शस पजेशन में थी। स्वतंत्र गवाह बस कंडक्टर और पुलिस गवाहों की गवाही अनुकूल पाई गई। अदालत ने पूरव ठाकुर और सूरज शर्मा को धारा 29 (षड्यंत्र) के आरोप से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि सीडीआर, फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन और कुरियर के सबूत पर्याप्त नहीं थे। सीसीटीवी फुटेज पर 65बी सर्टिफिकेट नहीं था इसलिए वह अस्वीकार्य माना गया। कुरियर पार्सल और बरामद हेरोइन के बीच कोई ठोस कड़ी नहीं जुड़ पाई। अदालत ने सजा सुनाते हुए गौरव को तीन साल की कठोर कैद और 50,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माने का भुगतान नहीं करने पर 6 महीने के अतिरिक्त साधारण कैद काटनी होगी। अदालत ने गौरव की उम्र (घटना के समय 19 साल) और पहली बार अपराध होने को ध्यान में रखा। अदालत ने कहा कि सेक्शन 42 और 50 एनडीपीएस की अनुपालन की जरूरत नहीं थी क्योंकि यह चांस रिकवरी थी और पर्सनल सर्च नहीं हुई थी। केस प्रॉपर्टी की सेफ कस्टडी और एसएफएसएल रिपोर्ट सही पाई गई। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुनाया कि एनडीपीएस के मामलों में बरामदगी, पजेशन और षड्यंत्र साबित करने के सख्त मानकों को दोहराता है। गौरव को जेल भेज दिया गया है। फैसले की कॉपी जिला मजिस्ट्रेट और जेल अधीक्षक को भेज दी गई है।
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