हाईकोर्ट ने आत्महत्या करने को विवश करने के मामले में ट्रायल का सामना कर रहे आईटीबीपी के तत्कालीन डिप्टी कमांडेंट इंजीनियर श्याम नेगी को निर्दोष ठहराते हुए उनके खिलाफ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शिमला द्वारा तय किए गए आरोप को खारिज कर दिया।
न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने प्रार्थी डिप्टी कमांडेंट इंजीनियर श्याम नेगी की याचिका को स्वीकारते हुए कहा कि जांच में सामने आई परिस्थितियों से यह स्पष्ट नहीं होता कि प्रार्थी ने शिमला के तारा देवी स्थित आईटीबीपी कैंप में आईटीबीपी जवान को आत्महत्या के लिए विवश किया।
17 सितंबर, 2015 को महाराष्ट्र के अकला जिला के तीलसारा तहसील के सौंधला गांव निवासी नितिन गोटमरे (24) ने तारादेवी में सर्विस गन से खुद को गोली मार ली थी। उसकी छाती में गोली लगी थी और साथ में गन पड़ी थी। नितिन के साथियों ने इसकी सूचना बेस कैंप में दी।
अधिकारी उसे आईजीएमसी शिमला लाए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। नितिन कई दिन से परेशान था, मगर इसका कारण किसी को नहीं बता रहा था। नितिन की जेब से पुलिस ने सुसाइड नोट बरामद किया गया था। इसमें लिखा था कि डिप्टी कमांडेंट इंजीनियर श्याम नेगी को बिल्कुल बर्दाश्त न किया जाए।
वह उसे कई दिन से प्रताड़ित कर रहा था। वह उसकी वजह से मर रहा है। इसका दोष किसी और को न दिया जाए। पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर डिप्टी कमांडेंट इंजीनियर श्याम नेगी को गिरफ्तार भी कर लिया था।
मामले की जांच के बाद 29 अगस्त 2016 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शिमला की अदालत ने एक आदेश पारित कर डिप्टी कमांडेंट इंजीनियर श्याम नेगी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत आरोप तय किए थे। इन आदेशों के खिलाफ प्रार्थी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी जिसे स्वीकारते हुए कोर्ट ने उन्हें इस मामले में निर्दोष ठहराया।