इसमें एचपीयू कहां तक सफल हो पाएगा यह देखने वाली बात होगी। चार सिस्टम में प्रश्न पत्र छपाई से लेकर परीक्षा करवाने, मूल्यांकन करवाकर समय से परिणाम घोषित करना टेढ़ी खीर होगा। सेमेस्टर सिस्टम में विश्वविद्यालय चार विषयों की परीक्षा करवाता है, लेकिन उसे अब ईयर सिस्टम में आठ विषयों की परीक्षा करवानी होगी।
कंपार्टमेंट परीक्षा के साथ रिवेल्यूएशन की सुविधा भी देनी पडे़गी। छात्रों की सालाना तीन बार होने वाली 24 विषयों की परीक्षा में डिग्री के लिए तय 132 क्रेडिट भी पूरे करने होंगे। इसी तरह से ईयर सिस्टम शुरू करने पर कॉलेजों में पहले से चल रहे टीचिंग स्टाफ को चार-चार सिस्टम की उत्तर पुस्तिकाओं को जांचने की जिम्मेदारी निभानी होगी, जो इतना आसान नहीं होगा।
2013 सत्र में सेमेस्टर सिस्टम को लागू कर दूसरों को राह दिखाने वाला हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय खुद पुराने ईयर सिस्टम के ढर्रे पर लौट आया है। एचपीयू ने यूजी में सीबीसीएस लागू किया था। यूजीसी ने 2016 में इसी तर्ज पर पूरे देश के विश्वविद्यालयों के लिए कॉमन करिकुलम तैयार किया।
इसमें बीस फीसदी तक का बदलाव कर इसे लागू भी करवाया। अब जब एचपीयू इस सेमेस्टर सिस्टम को लागू करने के लिए सभी विश्वविद्यालयों का पथ प्रदर्शक बन चुका था तो प्रदेश सरकार ने इसे फिर से ईयर सिस्टम में लाने का निर्णय ले लिया है।
वर्ष 2013 से पूर्व विश्वविद्यालय में ईयर सिस्टम लागू था। पूर्व कांग्रेस सरकार ने 2013-14 में देश में सबसे पहले च्वायस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) को लागू किया। इसके बाद वर्ष 2016 में यूजीसी ने एचपीयू के सीबीसीएस को अपनाकर नई व्यवस्था लागू की, जिसे हिमाचल ने भी अपनाया।
इस तरह से सीबीसीएस का यह दूसरा और प्रदेश में तीसरा सिस्टम बन गया। अब सरकार ने नए सत्र से फिर ईयर सिस्टम को लागू करने का फैसला किया है। इस लिहाज से ईयर और सीबीसीएस के दो-दो सिस्टम को मिलाकर यूजी स्तर की शिक्षा के कुल चार सिस्टम हो गए हैं।
नए-नए सिस्टम जुड़ने के साथ विद्यार्थी संख्या भी खासी बढ़ गई है। यूजी प्रथम सेमेस्टर के समय विद्यार्थियों की संख्या 35 हजार थी जो वर्तमान में बढ़कर 50 हजार तक पहुंच गई है।