जाहिर है, बैंक प्रबंधन से लेकर अफसरों के इस खेल की वजह से सहकारी बैंकों का एनपीए बढ़ता चला गया, लेकिन किसी ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया। यही नहीं, प्रदेश वित्त विभाग की एनपीए के बढ़ने के चलते भर्तियों पर आपत्ति जताने के बावजूद सरकार में बैठे अधिकारियों ने सभी सहकारी बैंकों में भर्तियां भी कर दी।
इन भर्तियों में भी नियमों को दरकिनार किया गया था। विजिलेंस जांच में इन आरोपों की पुष्टि करने वाले सबूत मिलने के बाद अब जांच का निष्कर्ष निकाला जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि जांच रिपोर्ट जल्द ही सरकार को भेजी जाएगी। इसके बाद सरकार से मंजूरी मिलने पर विजिलेंस मामले दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू करेगी।