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महीने में 1900 रुपये में बच्चों को कैसे पालेंगी चंद्रेश, पूरा परिवार बदहवास

Wed, 21 Mar 2018 01:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहपुर (कांगड़ा)
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इराक के मोसुल शहर से लापता जिला कांगड़ा के फतेहपुर के धमेटा गांव के संदीप (38) की हत्या की खबर परिवार वालों पर कहर बनकर टूटी है। सूचना मिलते ही पूरा परिवार आंसुओं के सैलाब में डूब गया। बुजुर्ग पिता दिलाबर सिंह और माता पुष्पा देवी को विश्वास ही नहीं हो रहा कि उनका इकलौता बेटा अब इस दुनिया में नहीं है जिसके लौटने की उम्मीद वे पिछले तीन साल नौ महीने से लगाए बैठे थे।

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मात्र 1900 रुपये प्रतिमाह मानदेय पर जलवाहक की नौकरी करने वाली संदीप की पत्नी चंद्रेश कुमारी को चिंता सता रही है कि 11 साल की बेटी पुल्कित और सात साल के बेटे रुद्राक्ष को कैसे पालेगी। बेटी पांचवीं और बेटा पहली कक्षा में पढ़ता है। बूढ़े मां-बाप का इकलौता सहारा छिनने से उनकी जिम्मेदारी भी चंद्रेश पर आ गई है।

तीन बहनों का रो-रोकर कर बुरा हाल है कि वे अब किसे राखी बांधेंगी। पूरा परिवार सदमे से बदहवास हो गया है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से हमेशा बेटे के जिंदा होने का आश्वासन मिलता रहा, लेकिन उसकी उम्मीद को मंत्री ने सुबह राज्यसभा में तोड़ दिया। संदीप की मौत की खबर जैसे ही पहुंची तो पूरा गांव शोक में डूब गया।

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जमीन बेचकर संदीप के लिए मकान बनवा रहे दिलाबर

पिछले पौने चार वर्षों में प्रदेश सरकार की ओर से महज एक बार वर्ष 2017 में एसडीएम फतेहपुर की तरफ से संदीप के परिवार को दस हजार रुपये की सहायता राशि दी थी। जबकि संदीप के साथी पंजाब के युवकों को पंजाब सरकार हर महीने 20-20 हजार रुपये सहायता देती है। 

संदीप के गमगीन पिता दिलाबर सिंह को केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ गुस्सा है। रुंधे हुए गले से उन्होंने कहा कि पौने चार वर्षों में किसी सरकार ने उनके परिवार की सुध नहीं ली। विदेश मंत्री से वह दिल्ली में कई बार मिले। हमेशा उन्हें बेटे के जिंदा होने के आश्वासन मिलते रहे। आज वही सरकार बता रही है कि उनका बेटा जिंदा नहीं है।

चार वर्ष से टूटे मकान में जैसे-तैसे दिन काटते रहे। हाल ही में पंचायत धमेटा की तरफ से घर बनाने के लिए एक लाख तीस हजार की राशि मंजूर हुई तो मकान का काम शुरू किया। मगर इतनी राशि से मकान बनाना मुश्किल था। बुजुर्ग पिता ने बहू व बच्चों के मकान का काम पूरा करवाने के लिए अपनी जमीन बेचकर बाकी राशि का इंतजाम किया। 

मौत की खबर सुनते ही इंद्रजीत की मां बेहोश

इंद्रजीत (श्याम) की मौत की खबर सुनते ही मां सलोचना देवी बेहोश हो गईं। 16 जून 2014 को इराक के मोसूल से इंद्रजीत लापता हो गया था। वह देहरा विधानसभा क्षेत्र की पंचायत भटहेड़ के कदरेटी गांव के रहने वाले थे। पिता परदेसी राम ने बताया कि उस दौरान इंद्रजीत की आयु महज 28 वर्ष थी।

मीडिया से बेटे की मौत की खबर सुनने के बाद शोक में परदेसी ने बताया कि उन्हें विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से कोई गिला शिकवा नहीं है। लेकिन, इतना दुख जरूर है कि केंद्र सरकार को पहले पता था तो बता देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि पिछले साल सितंबर में देहरा में उनका डीएनए सैंपल लिया गया था।

सरकार को उसी समय स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी कि उनके बच्चे को आतंकियों ने मार डाला है और वहां पर मिले नरकंकालों से डीएनए मिलान करना है। वहीं, इंद्रजीत की मां सलोचना देवी ने जब से अपने बेटे की मौत की खबर सुनी है, तभी से वह बेसुध हालत में हैं। 

इंद्रजीत के दो भाई सुभाष चंद और अजय कुमार हैं। इंद्रजीत इनमें सबसे छोटा था। उसकी शादी नहीं हुई थी। इंद्रजीत के पिता का पिछले साल हार्ट का आपरेशन हुआ था। जबकि मां को दो साल पहले पैरालाइज अटैक की शिकार हो गई।

डीसी कांगड़ा ने फोन पर की बात 
उपायुक्त कांगड़ा संदीप कुमार ने फोन पर पारिवारिक सदस्यों से बात की। उन्होंने पीड़ित परिवार को हर तरह की मदद करने का आश्वासन दिया।
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गरीबी दूर करने इराक गया था इंद्रजीत

28 वर्ष की उम्र में इंद्रजीत इराक जाते समय अपने माता पिता से यह कहकर गया था कि अब मैं परिवार की गरीबी दूर कर दूंगा। इराक में जाकर पैसे कमाऊंगा और अपनी माता व पिता को दूंगा।

हिमाचल सरकार ने नहीं की कोई मदद
परदेसी राम ने बताया कि हिमाचल के नेताओं ने हमारे साथ बात करने की कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। इस बात का मलाल हमेशा रहेगा कि पंजाब सरकार की तरह हिमाचल सरकार ने कोई आर्थिक मदद नहीं की।

हम जब भी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मिलने दिल्ली जाते थे, तब पंजाब के पीड़ित परिवार वाले भी हमारे साथ ही होते थे। वे बताते थे कि पंजाब सरकार उन्हें हर महीने 20 हजार रुपये की सहायता राशि देती है जबकि हिमाचल सरकार की तरफ से आर्थिक सहायता तो दूर, हालचाल तक नहीं पूछा गया। 

अनुराग ठाकुर पर निकाली भड़ास
पिता ने सांसद अनुराग ठाकुर पर भी भड़ास निकाली। कहा कि अनुराग ठाकुर ने एक बार भी बात नहीं की जबकि हम कई बार विदेश मंत्रालय व विदेश मंत्री से मिलने जा चुके हैं। 

आखिरी बार 16 जून 2014 को हुई थी बात
इंद्रजीत वर्ष 2013 में इराक के मोसुल शहर में बगदाद की कंपनी टीएनएच (तारिक अन गुल) में पोकलेन ऑपरेटर की नौकरी करने गया था। 16 जून 2014 में उसकी आखिरी बार परिवार के लोगों से बात हुई थी।

इंद्रजीत ने उसके साथ टॉर्चर की बात भी कही थी। उसने कहा था कि उनको चार लोग किरकूभेजी ले गए हैं। उसके बाद उनके पासपोर्ट वापस कर दिए गए थे। इंद्रजीत की उसके भाई सुभाष चंद से यह आखिरी बातचीत हुई थी।
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