चार दिनों के भागदौड़ के बीच मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह नौ हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव लेकर हिमाचल लौट आए है। मुंबई, बंगलूरू और अहमदाबाद में आयोजित इनवेस्टर मीट बेहद सफल रही। महाराष्ट्र के औद्योगिक घरानों ने हिमाचल में सबसे अधिक चार हजार करोड़ रुपये से अधिक निवेश करने की इच्छा जताई गई है। जबकि, बंगलूरू और अहमदाबाद के उद्योगपतियों से भी प्रदेश में निवेश के प्रति आकर्षित कराने में मुख्यमंत्री सफल रहे।
नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाने वाले अदानी ग्रुप ने भी हिमाचल प्रदेश में सेब भंडारण के लिए दो कोल्ड स्टोर बनाने का प्रस्ताव दिया है। मोदी के गुजरात के उद्योगपतियों ने दो हजार करोड़ से अधिक का प्रस्ताव आया है। गुजरात से सबसे अधिक निवेश का प्रस्ताव रसना समूह की ओर से 700 करोड़ रुपये का दिया गया है।
इंडो-रामा टेक्सटाइल उद्योग ने हिमाचल में वस्त्र क्षेत्र में 300 करोड़ रुपये के निवेश की इच्छा व्यक्त की है। इसी प्रकार कर्नाटक की राजधानी बंगलूरू से भी दो हजार करोड़ रुपये का प्रपोजल आया है। जानकारों का कहना है कि अगर उक्त निवेश के प्रस्ताव वाकई धरातल पर उतरे तो प्रदेश के हजारों युवकों को रोजगार मिलेगा। कई क्षेत्रों में प्रदेश का अभूतपूर्व विकास हो सकता है। इस मीट के आयोजन में आईपीसी के उपनिदेशक और समन्वयक तिलक शर्मा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही।
मुझे बेहद प्रसन्न्ता है कि तीनों राज्यों के बड़े औद्योगिक घरानों ने हिमाचल प्रदेश में निवेश के लिए अच्छी प्रतिक्रिया दी है। इससे प्रदेश को भविष्य में काफी लाभ होगा। निवेश के प्रस्ताव धरातल पर उतरे हैं तो प्रदेश के हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। कई क्षेत्रों में इससे अभूतपूर्व विकास हो सकती है।
-वीरभद्र सिंह, मुख्यमंत्री