समस्त हारियान इसका पालन करते आ रहे हैं। हारियानों ने इसको लेकर प्रस्ताव भी पारित किया है। वर्ष 2017 में पुजारियों की आपसी सहमति से देवता के ठहरने का स्थान छह-छह माह रखा गया था। 16 अगस्त को देवता को लाहुंड में पुजारी प्रीतम चंद शर्मा के घर ले जाने दिया गया।
लेकिन पुजारी ने 19 अगस्त की रात को देवता के समक्ष बलि देकर देवता के मान सम्मान को ठेस पहुंचाई। उन्होंने कहा कि हारियान क्षेत्र में 1984 से पशु बलि पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसलिए पुजारियों के छह-छह माह के कार्यकाल को स्थगित किया जाए।
देवता को देवालय की कोठी स्थान वला में रखने की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि देवालय सुरक्षा की दृष्टि से भी सुरक्षित है। इसमें लोहे के दरवाजे और सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं।
इस संबंध में थाना प्रभारी बंजार सीआर चौधरी ने कहा कि शिकायत पत्र मिला है। पुलिस को मौके पर ऐसा कोई सुबूत नहीं मिला है। शिकायत के आधार पर मामले की छानबीन की जा रही है।
हारियान दुर्गा चंद, हीरा लाल, रोशन लाल, आलम चंद, साहिल शर्मा, उत्तम सिंह, सुरेंद्र शर्मा, भुवनेश्वर देव, गिरधारी लाल, लोतम राम, पूर्ण चंद, यज्ञा चंद, सुनील भारद्वाज, संगत राम, कमलेश कुमार, देवेंद्र शर्मा, संजय कुमार, जीवन सिंह, महेंद्र पाल, विद्यासागर, राजेश शर्मा, विजय शर्मा, जगदीश शर्मा, सुरेश
चौहान, नरेश ठाकुर, यशवंत सिंह, हुकम चौहान, प्रशांत शर्मा, भारतभूषण, देवेंद्र सिंह, राकेश, राजू शर्मा, भूपेंद्र शर्मा, रूप चंद, पुष्पेंद्र शर्मा, संदीप शर्मा, ब्रजलाल, जॉनी शर्मा, वरुण चौहान, भाग
सिंह, हरि सिंह नेगी ने कहा कि वर्ष 1984 से देवता के आदेश पर पशु बलि पर पूर्ण प्रतिबंध है। लेकिन देवता के समक्ष पशु बलि करने से 34 साल पुरानी परंपरा टूटी है।