सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पद होने पर हाईकोर्ट की फटकार के बाद हरकत में आए शिक्षा विभाग ने सख्त फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। प्रदेश सरकार ने शिक्षकों की प्रतिनियुक्तियां रद्द करते हुए शिक्षकों को मूल स्कूल में लौटने के आदेश दिए हैं।
वेतन किसी स्कूल से और सेवाएं किसी दूसरे स्कूल में देने के मामले सामने आने पर शिक्षा सचिव डॉ. अरुण कुमार शर्मा ने कड़ा संज्ञान लिया है। शिक्षा सचिव ने कहा है कि शिक्षकों को उसी स्कूल में सेवाएं देनी हाेंगी, जिस स्कूल से वेतन दिया जा रहा है। दूसरे स्कूलों में प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त शिक्षकों को अपने मूल स्कूलों में लौटना होगा।
शिक्षा विभाग के अनुसार प्रदेश में सैकड़ों ऐसे शिक्षक हैं, जो प्रतिनियुक्ति पर शहरी क्षेत्रों से सटे स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। इन शिक्षकों के इस खेल के चलते मूल स्कूल में पद रिक्त होने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। प्रतिनियुक्ति के चलते सरकारी रिकार्ड में मूल स्कूल में पद रिक्त नहीं दर्शाया जाता है।
राजधानी शिमला में करीब 25 ऐसे शिक्षक चिह्नित हुए हैं, जिन्हें नियुक्त शहर से बाहर के स्कूलों में किया गया है, जबकि वे प्रतिनियुक्ति पर शहर में ही डटे हुए हैं। यह मामला सामने आने के बाद शिक्षा सचिव ने सभी प्रतिनियुक्तियां रद्द करने के आदेश दिए हैं।