उड़ी और बारामूला का सांस्कृतिक दल अपनी गोजरी और पहाड़ी शैली नृत्य को प्रस्तुत कर रहा है। नई पीढ़ी गीत-संगीत से देश से जोड़कर आतंकवाद के मुंह पर तमाचा मारना चाहती है।
टीम इंचार्ज गुलजार अहमद और सैयद आरिफ हुसैन का कहना है कि आज कश्मीर की जो लड़कियां यहां आकर अपनी संस्कृति दिखा रही हैं, उन्हें घरों से बाहर निकलने तक की इजाजत नहीं है।
शिक्षा की कमी के कारण युवा ज्यादा कार्य नहीं कर पाते हैं, लेकिन अगर रोजगार के अवसर घाटी के युवाओं को मिलें तो आतंकवाद खत्म हो जाएगा। आए दिन पाकिस्तान से होने वाली गोलाबारी से उनके लोग, और मवेशी मारे जाते हैं, जो सबसे भयावह मंजर होता है।
कश्मीर से आईं लड़कियों वाहेदा, उस्मा, पिंतलू, सजरत और स्वीटी का कहना है कि महिलाओं को बाहर जाकर घूमने नहीं दिया जाता है। डर के मारे वे सोशल मीडिया में अपनी फोटो तक नहीं लगा पातीं।
शाम आठ बजे के बाद घरों से बाहर निकलना बंद हो जाता है। हर समय डर लगा रहता है कि पता नहीं आतंकवाद की वजह से कौन सा इलाका सुलग जाए। वह अगर हिमाचल अपनी संस्कृति की प्रस्तुति देने पहुंचीं हैं तो इसकी वजह भी भारतीय सेना ही है।