फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ब्रेस्ट कैंसर को मात देकर मेट्रन विद्या शर्मा बन गई मिसाल

Thu, 08 Mar 2018 02:23 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
विज्ञापन
विज्ञापन

प्रसूति गृह में गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा हो या फिर नवजात बच्चे की देखभाल करनी हो, मदद के लिए सबसे पहले ‘विद्या दीदी’ का ही नाम आता है। शहर के दीन दयाल अस्पताल (शिमला, हिमाचल प्रदेश) में तैनात मैट्रन विद्या शर्मा 32 साल से महिलाओं की मदद कर रही हैं।

विज्ञापन



ब्रेस्ट कैंसर को मात देने के बाद विद्या ने न सिर्फ अपनी सेवाएं जारी रखीं बल्कि महिलाओं को जागरुक करने का भी बीड़ा उठाया। वर्तमान में वह ब्रेस्ट फीडिंग तकनीक को धात्री माताओं को प्रशिक्षित करने के लिए राज्य प्रशिक्षक का काम देख रही हैं।

मूलत: मंडी की रहने वाली विद्या अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली से न्यू बोर्न नर्सिंग केयर में प्रदेश की इकलौती प्रशिक्षित परिचारिका है। गर्भवती महिलाओं की मदद के साथ साथ विद्या महिलाओं को परिवार नियोजन, अंधता निवारण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम की विभिन्न योजनाओं के बारे में भी जागरुक कर रही हैं।
विज्ञापन


विद्या कहती हैं कि 1986 में बैजनाथ अस्पताल से उन्होंने नौकरी शुरू की थी। लेकिन फिर बीमारी के चलते 1994-95 में एम्स जाना पड़ा। इसी दौरान देखा कि महिलाएं किन तरह की परेशानियों से गुजरती हैं, कैसे उन्हें मदद दी जा सकती है।

स्वस्थ होते ही अस्पताल में प्रसूति महिलाओं की मदद शुरू कर दी। अब ड्यूटी के बाद भी कई महिलाएं सलाह लेने विद्या के पास पहुंचती हैं। दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रंजना राव का कहना है कि अस्पताल में उनकी सेवाएं सराहनीय रही हैं। उनका अनुभव साथी कर्मचारियों के लिए भी अहम है।

महिलाओं को पैतृक संपत्ति का हक दिलाने को कर रहीं संघर्ष

सांगला (किन्नौर)। पहले महिला प्रधान बनकर नेतृत्व का लोहा मनवाया तो अब महिलाओं को पैतृक संपत्ति का हक दिलाने के लिए संघर्ष चला रखा है। किन्नौर जिले के रिब्बा गांव की रहने वाली रतन मंजरी का संघर्ष अब अदालत में कानूनी जंग के पड़ाव पर है।

साथ ही वह ग्रामीणों को भी महिलाओं के हक के लिए जागरूक कर रही हैं। वर्ष 1987 में प्रदेश की पहली महिला प्रधान रहीं रतन मंजरी वर्तमान में महिला कल्याण परिषद की अध्यक्ष हैं।

महिलाओं को आरक्षण दिलाने के लिए भी उनकी आवाज लगातार मुखर रही है। उनका कहना है कि किन्नौर की बेटियों और महिलाओं को पैतृक संपत्ति का अधिकार मिलना चाहिए। इसके लिए जिले के तीनों खंडों की 65 पंचायतों की जनता को साथ लाने की कोशिश की जा रही है।

‘छोटा परिवार सुखी परिवार’ की अलख जगा रही प्रज्जवल बस्टा

छह भाई बहनों में सबसे बड़ी और देश की सबसे कम उम्र की बीडीसी अध्यक्ष प्रज्जवल बस्टा लोगों में ‘छोटा परिवार सुखी परिवार’ की अलख जगा रही हैं। महज 21 साल की उम्र में प्रज्जवल ने जुब्बल कोटखाई से बीडीसी अध्यक्ष बनकर रिकार्ड कायम किया था। इसके लिए उन्हें ‘हिंदुस्तान यंग अचीवर’ अवार्ड भी मिल चुका है।

किसान परिवार से संबंध रखने वाली प्रज्जवल का कहना है कि वह छह भाई बहनों में वह सबसे बड़ी हैं। बड़े परिवार के कारण कई बार समस्याएं भी पेश आई हैं लेकिन अब जहां भी कार्यक्रम में जाती हैं महिलाओं को छोटे परिवार के प्रति जागरूक करती हैं। प्रज्जवल का कहना है कि अगर उनका भी छोटा परिवार होता तो वह अपनी भाई बहनों को अधिक सुविधाएं उपलब्ध करवा पाती।

प्रज्जवल ने शुरूआती पढ़ाई कोटखाई के सरकारी स्कूल से करने के बाद शिमला के राजकीय कन्या महाविद्यालय से स्नातक की है। हिमाचल विश्वविद्यालय से इन्होंने लॉ की डिग्री ली है। जुब्बल कोटखाई पंचायत समिति इस बार दीनदयाल उपाध्याय सशक्त पंचायत समिति अवार्ड की भी प्रबल दावेदार है।

निशुल्क तालीम की अलख जगा रही शकराह की परवीन बानो

शिमला। परवीन बानो को पहले लोग ससुराल के डिपार्टमेंटल स्टोल को कामयाबी से चलाने के लिए जानते थे, लेकिन अब उसे जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में ट्यूशन पढ़ाने के लिए अलग पहचान मिली है।

राजधानी के घणाहट्टी से सटी शकराह पंचायत में परवीन बानो की ख्वाहिश अब मुहिम की तरह साकार हो रही है। कारोबारी व्यस्तता के बावजूद परवीन बच्चों को पढ़ाने के लिए समय निकालती है।

बीपीएड की डिग्री हासिल परवीन के पढ़ाए बच्चे अच्छा प्रदर्शन भी करने लगे हैं। दुकान का काम निपटाने के बाद परवीन बच्चों को होमवर्क कराने से लेकर गणित, अंग्रेजी और विज्ञान की ट्यूशन देती है।

परवीन ने दो बच्चों को मुफ्त में पढ़ाने से शुरुआत की थी जिसके अच्छे नतीजे आने पर और लोग भी बच्चे भेजने लगे।

परवीन के शौहर अनवर हुसैन और शिक्षिका सगी बहन व जेठानी जाहिदा बानो भी उसका साथ दे रहे हैं। परवीन कहती है कि उन्हें बच्चों को मुफ्त पढ़ाने में सुकून मिलता है।
विज्ञापन

तो शिक्षिका ने छेड़ दी नशाबंदी मुहिम

सुरेश तोमर, पांवटा साहिब (सिरमौर)। पिछले तीन वर्षों से सेवानिवृत्त शिक्षिका संगीता शर्मा नशाबंदी के खिलाफ मुहिम चला रही है। जिसमें पांवटा और शिलाई क्षेत्र की पंचायतों में गांव गांव जाकर महिलाओं व युवाओं को जागरुक किया जा रहा है। उसे इस कार्य के लिए 15 अगस्त को सम्मानित भी किया जा चुका है।

गिरिपार की दुगाना कांडों पंचायत निवासी संगीता शर्मा ने करीब 23 वर्षों तक शिक्षा विभाग में बतौर जेबीटी सेवाएं दी हैं। इस दौरान स्कूली बच्चे घर पर आए दिन घर के पुरुष सदस्यों के शराब पीने से होने वाली समस्याएं सुनती थी। यह देखकर संगीता ने महिलाओं को जागरुक करने का प्रण कर लिया।

शिक्षा विभाग से नवंबर 2015 में सेवानिवृत्त होते ही नशाबंदी मुहिम शुरू कर दी। पांवटा के वार्ड-3 आदर्श कॉलोनी व शिलाई के नेड़ा बास से की गई शुरुआत तेजी से आगे बढ़ी। अब पांवटा विस क्षेत्र के कोटड़ी व्यास, गुलाबगड़, जामनीवाला, कुंडियों, तारुवाला, बद्रीपुर, अजौली व आंजभोज तथा शिलाई विस क्षेत्र में ग्राम पंचायत दुगाना, शावगा, मानल, नेड़ा, मस्तभौज के

शरली, गुद्दीमानपुर, कांडो, च्योग, पभार व जुईनल समेत दर्जनों गांवों में महिलाएं इस मुहिम से जुड़ चुकी हैं। संगीता शर्मा को इस कार्य के लिए वर्ष 2016 में तत्कालीन एसडीएम पांवटा एचएस राणा ने 15 अगस्त पर सम्मानित भी किया। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें