बीते साल आउट लुक पत्रिका ने डेमूल गांव को सामुदायिक प्रबंधन से चलने वाले देश के सर्वश्रेष्ठ होम स्टे के लिए रिस्पांसिबल टूरिज्म अवॉर्ड से सम्मानित किया है। देहरादून की रहने वाली ईशिता ने स्थानीय लोगों से इलाके की जानकारी हासिल कर ईकोस्फीयर एनजीओ बनाया।
वर्ष 2008 में की गई यह शुरुआत एक अभियान के रूप में आगे बढ़ी। डेमूल गांव में अब रोटेशन सिस्टम पर सैलानियों की बुकिंग होती है। ईशिता की पहल से वजूद में आई एनजीओ ने सोशल मीडिया का सहारा लिया।
कृषि, आईटी एवं जनजातीय विकास मंत्री डॉ रामलाल मारकंडा कहते हैं कि प्रतियोगिता के इस दौर में डेमूल गांव ने पर्यटन के क्षेत्र में सामुदायिक होम स्टे प्रबंधन का देश भर में एक मिसाल कायम की है।
एनजीओ के कॉर्डिनेटर छेरिंग नोरबू वैद्य बताते हैं कि पहले यह मॉडल प्रासंगिक नहीं लग रहा था लेकिन अब यह मॉडल मिसाल बन गया है।