फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ऐतिहासिक मिजंर मेले का क्या है शाहजहां से कनेक्शन

विज्ञापन
विज्ञापन
मिर्जा परिवार के मुखिया एजाज मिर्जा की ओर से पिंक पैलेस में भगवान रघुवीर को मिंजर अर्पण के साथ रविवार को चंबा मिंजर महोत्सव का आगाज हुआ। मिर्जा परिवार की सातवीं पीढ़ी ने इस परंपरा का निर्वहन किया। मुस्लिम और हिंदू समाज की एकता के प्रतीक मिंजर मेले में निकाली शोभायात्रा की अगुवाई उपायुक्त एम सुधा देवी ने की।
विज्ञापन


जबकि मुख्यातिथि वनमंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने मिंजर ध्वज फहराकर एक सप्ताह तक चलने वाले इस उत्सव का आगाज किया। हालांकि, परंपरा अनुसार राज्यपाल की ओर से मेले का शुभारंभ कराया जाता है लेकिन यह तीसरा मौका है जब राज्यपाल मेले में शिरकत नहीं कर पाए। अगली स्लाइड में पढ़िए मिजंर मेले का शाहजहां कनेक्शन।

शाहजहां ने भेंट किए थे रघुवीर के चिह्न

चंबा के राजा पृथ्वी सिंह को दिल्ली में शाहजहां ने खुश होकर अपने खजाने से रघुवीर के चिह्न भेंट किए थे। इसे लेकर मिर्जा परिवार चंबा आया था और यहीं रहने लगा। रघुवीर के आने की खुशी में मेला शुरू हुआ था। उस समय सोने से बनी मिंजर भेंट की गई। मिर्जा परिवार तभी से मिंजर भेंट कर मेले का शुभारंभ करता आ रहा है।

सोने की मिंजर की जगह अब रेशम की लडि़यां अर्पित की जाती हैं। चंबा में बहनों ने भाइयों को मिंजर बांध कर इस महोत्सव को रक्षा पर्व के रूप में भी मनाया। एक सप्ताह बाद मेला समाप्त होने के बाद बांधी गई मिंजर को रावी नदी में विसर्जित कर दिया जाता है।
विज्ञापन

पहले भैंसें को बहाया जाता था रावी में

मिंजर महोत्सव के दौरान आजादी से कई साल बाद तक भैंसें को रावी नदी में बहाया जाता था। यदि भैंसा तैर कर दूसरी तरफ निकल गया तो इसे सुख, समृद्धि के रूप में देखा जाता था। अगर भैंसा रावी में बह जाए या वापस लौट आया तो त्रासदी के रूप में देखा जाता था। अब प्रतीक रूप में नारियल को रावी में बहाया जाता है।

पाकिस्तान में भी मनाते हैं मिंजर- आजादी के दौरान चंबा के कई परिवार पाकिस्तान में बस गए। वहां भी सावन के महीने में मिंजर महोत्सव मनाया जाता है। पाकिस्तान में भी चंबा की परंपरा को लोग आज भी जीवित रखे हुए हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें