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Kullu Dussehra: देवताओं का महाकुंभ अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा शुरू, ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते-गाते पहुंचे देवलू

Tue, 24 Oct 2023 07:10 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू

सार

 देवताओं के इस महाकुंभ में 332 देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजा गया है। सोमवार देर शाम तक 200 से अधिक देवी-देवता कुल्लू पहुंच गए थे। मंगलवार सुबह भी देवी-देवताओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा।
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ढोल-नगाड़ों की धुन पर नाचते-गाते देवताओं के साथ पहुंचे देवलू - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का मंगलवार को आगाज हो गया है। सुबह से ही ढालपुर में देवताओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। वहीं, बड़ी संख्या में देवता भगवान रघुनाथ के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए पहुंचे।देव महाकुंभ कुल्लू दशहरा के लिए आए हुए देवी-देवताओं ने भगवान रघुनाथ के दरबार में हाजिरी भरी। सैकड़ों देवी-देवता लाव-लश्कर के साथ भगवान रघुनाथ की नगरी रघुनाथपुर में पहुंचे। यहां पर देवी-देवताओं का भगवान रघुनाथ से भव्य देवमिलन हुआ। ढोल, नगाड़ों की थाप से पूरी घाटी गूंज उठी। यहां पर भव्य देवमिलन को देखने के लिए काफी अधिक संख्या में श्रद्धालु उमड़े।

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सोमवार को ढालपुर स्थित अस्थायी शिविरों में पहुंचे देवी-देवताओं की मंगलवार सुबह पूजा-अर्चना हुई। इसके बाद देवताओं के रघुनाथपुर में भगवान रघुनाथ मंदिर पहुंचने का सिलसिला आरंभ हुआ। सुबह आठ बजे से देवताओं के आने का सिलसिला शुरू हुआ, जो दोपहर बाद तक चलता रहा। भगवान रघुनाथ के दरबार में हाजिरी लगाने के बाद देवता अस्थायी शिविरों में लौटे। बंजार के देवता श्रृंगा ऋषि, देवता बालू नाग, शियाह के देवता जमदग्नि ऋषि, गर्ग ऋषि सहित सैकड़ों देवताओं ने राजमहल में जाकर भी देव परंपरा निभाई। स

बसे पहले देवता भगवान रघुनाथ मंदिर में पहुंचे। इसके बाद देवता राजमहल में भी गए। इस दौरान कई देवताओं ने गूर के माध्यम से अपनी बात भी कही। अब यह देवी-देवता अस्थायी शिविरों में ही विराजमान हो जाएंगे। मोहल्ला के दिन एक बार फिर सभी देवी-देवता अपने अस्थायी शिविरों से बाहर निकलेंगे। वहीं करीब डेढ़ किलोमीटर के इस फासले में लोगों ने जगह-जगह देवताओं का स्वागत किया।
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 ढालपुर में 1300 जवान तैनात रहेंगे। ड्रोन-सीसीटीवी से भी नजर रखी जाएगी। भगवान रघुनाथ के सम्मान में वर्ष 1660 से मेला मनाया जा रहा है। मेले के लिए आउटर सराज के 14 देवी-देवता 200 किमी दूर से कुल्लू पहुंचे हैं। इनमें देवता खुडीजल, ब्यास ऋषि, कोट पझारी, टकरासी नाग, चोतरू नाग, बिशलू नाग, देवता चंभू उर्टू, देवता चंभू रंदल, सप्तऋषि, देवता शरशाई नाग, देवता चंभू कशोली, कुई कांडा नाग, माता भुवनेश्वरी शामिल हैं। 

पहली बार 14 देशों के सांस्कृतिक दल देंगे प्रस्तुतियां

कुल्लू दशहरा में पहुंचे देवी-देवता। - फोटो : संवाद
मुख्य संसदीय सचिव सुंदर सिंह ठाकुर ने बताया कि दशहरा में पहली बार मलयेशिया, रूस, साउथ अफ्रीका, कजाकिस्तान, रोमानिया, वियतनाम, केन्या, श्रीलंका, ताइवान, किरगीस्तान, इराक और अमेरिका के सांस्कृतिक दल प्रस्तुति देंगे। वहीं, पहली सांस्कृतिक संध्या में पार्श्व गायक साज भट्ट, दूसरी में पंजाबी गायिका सिमर कौर, तीसरी में यूफोनी बैंड, लमन बैंड, चौथी में पंजाबी गायक शिवजोत, पांचवीं में जसराज जोशी, छठी में पार्श्व गायिका मोनाली ठाकुर, हारमनी ऑफ द पाइन्स के कलाकार आकर्षण रहेंगे। अंतिम संध्या में लोक कलाकार रमेश ठाकुर, कुशल वर्मा, लाल सिंह, खुशबू भारद्वाज, ट्विंकल दर्शकों का मनोरंजन करेंगे।

अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में 32 साल बाद पहुंचे भगवान कार्तिक स्वामी

भगवान कार्तिक स्वामी व अन्य देवता। - फोटो : संवाद
मनाली के सिमसा गांव के भगवान कार्तिक स्वामी अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में लगभग 32 साल बाद पहुंचे हैं। मंगलवार सुबह राज महल में जाकर देवता ने प्राचीन परंपरा का निर्वहन किया। इसके बाद देवता ढालपुर में अपने अस्थायी शिविर में विराजमान हुए। कुल्लू दशहरे में हर वर्ष 300 से ज्यादा देवी-देवता पहुंचते हैं। इसमें कुल्लू, मनाली, आनी, बंजार के देवी-देवता भाग लेते हैं।

देवता। - फोटो : संवाद
इस वर्ष मनाली के सिमसा गांव के कार्तिक स्वामी तीन दशकों के बाद कुल्लू दशहरा उत्सव में शामिल हुए हैं। जिला कारदार संघ के अध्यक्ष दोत राम ने बताया कि कार्तिक स्वामी कुल्लू दशहरा में शिरकत कर रहे हैं। कार्तिक स्वामी सिमसा के कारदार युवराज ठाकुर ने कहा कि उनके आराध्य देव 32 साल के बाद कुल्लू दशहरा उत्सव में भाग लेने से कारकूनों और देवलुओं में उत्साह का माहौल है।
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रथयात्रा के लिए ढालपुर आने से पहले हुई भगवान रघुनाथ की पूजा-अर्चना

देवी-देवता। - फोटो : संवाद
भगवान रघुनाथ के सम्मान में वर्ष 1660 से अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव मनाया जा रहा है। रथयात्रा के लिए ढालपुर आने से पहले भगवान रघुनाथ की पूजा-अर्चना की गई। देवताओं के इस महाकुंभ में 332 देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजा गया था। करीब 300 देवी-देवताओं के उत्सव में शामिल होने की उम्मीद है। 
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